इस बार इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी के लिए चयनित कराने में अफसर कोई कसर छोड़ने के मूड में नहीं है। पिछली बार की गलतियों से सबक लेते हुए इस बार स्मार्ट सिटी के लिए नए सिरे से योजना तैयार की जा रही है, जिसे जून में केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। इसके लिए नगर निगम अपनी तैयारी में जुट गया है। मंडलायुक्त भी 27 अप्रैल को संबंधित विभागों के अफसरों के साथ बैठक कर योजना का खाका तैयार करेंगे। इस बार रेट्रोफिटिंग में मोहल्ले का चयन आम लोगों की राय से करने की योजना है, क्योंकि माना जा रहा है कि पिछली बार इसी की वजह से इलाहाबाद का स्मार्ट सिटी में चयन नहीं हो सका।
केंद्र सरकार जिन शहरों को स्मार्ट सिटी के लिए चयनित करेगा, वहां विकास कार्य आदि के लिए पांच वर्ष तक हर साल सौ करोड़ रुपये केंद्र से मिलेंगे। इतनी ही रकम राज्य सरकार को देनी होगी। करीब तीन माह पहले हुई प्रथम चरण की प्रतियोगिता में देशभर से 98 शहर शामिल थे। इसमें यूपी से इलाहाबाद समेत 12 शहरों ने दावेदारी पेश की थी लेकिन यूपी का कोई जिला चयनित नहीं हुआ। हालांकि इलाहाबाद के लिए एक चीज अच्छी रही कि उसे केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान में सफाई के लिए बेहतर प्रयास पर प्रथम पुरस्कार मिला है, सो इस बार केंद्र को भेजे जाने वाले प्रपोजल में इसका फायदा मिलना तय है।
इसके अलावा पिछली बार स्मार्ट सिटी के रेट्रोफिटिंग में कटरा को शामिल किया गया था। इस बार सिविल लाइंस को शामिल करने की तैयारी है। इसके लिए आम राय भी ली जा रही है। रेट्रोफिटिंग के तहत पांच सौ एकड़ या उससे अधिक के इलाके को वर्तमान परिस्थिति के हिसाब से विकसित किया जाना है, जिसमें 24 घंटे बिजली-पानी, ट्रैफिक, सफाई, ग्रीनरी आदि की बेहतर तरीके से व्यवस्था हो। इसके अलावा यह भी देखा जाना है कि उसे मेंटेन रखने के लिए उस इलाके से राजस्व कैसे आएगा। इन दोनों ही मामलों में कटरा फिट नहीं बैठा। अब दूसरे चरण की प्रतियोगिता के लिए जून तक प्रपोजल भेजा जाना है, सो नगर निगम माइगप एवं फेसबुक के जरिए लोगों के सुझाव ले रहा है। उधर, 27 अप्रैल को होने वाली बैठक में एरिया बेस्ट डेवलपमेंट, सिटी प्रोफाइल एवं फ्यूचर विजन, बजट, सिटीजन इंगेजमेंट आदि प्लान तैयार होगा।
अमेरिका इलाहाबाद समेत अजमेर और विशाखापट्टनम को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए कार्य कर रहा है। अमेरिकी सरकार स्मार्ट सिटी के रूप में होने वाले किसी भी काम के लिए रकम नहीं खर्च करेगी, बल्कि योजना और डीपीआर तैयार करेगी। इसके लिए अमेरिकी विशेषज्ञों की टीम इलाहाबाद का लगातार दौरा कर रही है। यह डीपीआर अमेरिका अपने यहां के निवेशकों को दिखाएगी और उन्हें इलाहाबाद में निवेश करने के लिए प्रेरित करेगी, जबकि केंद्र सरकार की ओर से स्मार्ट सिटी का चयन होने पर केंद्र और प्रदेश सरकार से हर वर्ष दो सौ करोड़ रुपये मिलेंगे। इसलिए अफसर भी अमेरिका से ज्यादा केंद्र सरकार की योजना पर जोर दे रहे हैं।