रास्ते के विवाद में गई महिला की जान
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इलाज में लापरवाही से गर्भवती महिला की मौत के मामले में जिला न्यायालय ने छह डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही कर्नलगंज इंस्पेक्टर को विवेचना करने के लिए भी कहा है। पीड़ित परिवार की अर्जी पर यह आदेश एसीजेएम परमेश्वर प्रसाद ने वादी के अधिवक्ता सुधीर श्रीवास्तव को सुनकर दिया।
शिशिर गुप्ता की पत्नी श्वेता की मोहक अस्पताल में इलाज के दौरान 13 जून 2016 को मौत हो गई थी। उसने अर्जी में डॉ. विनीता मिश्रा, डॉ. बीके मिश्रा, डॉ. कमल सिंह, डॉ. हरीश श्रीवास्तव, डॉ. स्वतंत्र सिंह और डॉ. मोहित जैन पर गलत इलाज करने का आरोप लगाया और इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। वादी का कहना है कि उसकी पत्नी श्वेता कास्मेटिक सेंटर का संचालन करती थी। वह गर्भवती थी। डॉ. विनीता मिश्रा से ‘ईशी क्लीनिक’ में इलाज करा रही थी।
डॉक्टर ने बताया कि गर्भ में बच्चे का विकास नहीं हो रहा है। गर्भ गिराना पड़ेगा। 13 जून 2016 को भर्ती कर लिया और बिना वादी की अनुमति और विशेषज्ञ की राय के स्वयं ऑपरेशन की तैयारी करने लगी। आरोप है कि एनिसथीसिया का भारी डोज दे दिया था, जिसके लिए डॉक्टर अधिकृत नहीं थी और न ही विशेषज्ञ थीं। ईसी क्लीनिक आपरेशन के योग्य भी नहीं थी। हालत खराब होने पर अन्य आरोपी डॉक्टर आए और मरीज को मोहक अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कर दिया, जहां रात में उसकी मृत्यु हो गई।
वहीं सीएमओ की ओर से दाखिल रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रकरण में तीन डॉक्टरों की टीम गठित की थी। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि डॉ. विनीता ने मरीज को प्रासटाडिन इंजेक्शन लगाया था, जिससे तीव्र रक्तस्राव हुआ और उसी से मौत हो गई थी। जांच टीम को डॉ. विनीता ने भी यही बयान दिया था। कोर्ट ने प्रकरण में संज्ञेय अपराध का होना पाते हुए मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।