हालांकि दो दिन परीक्षा कराने का निर्णय होता है तो आयोग को अभ्यर्थियों के विरोध का सामना करना होगा, क्योंकि अभ्यर्थी नहीं चाहते हैं कि एक समान मूल्यांकन के लिए मानकीकरण (नॉर्मलाइजेशन) की व्यवस्था लागू की जाए। यह तभी हो सकता है, जब सभी अभ्यर्थियों की परीक्षा एक ही दिन में एक पाली में पूरी करा ली जाए। ऐसी स्थिति में एक समान मूल्यांकन की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
सूत्रों का कहना है कि आयोग ने भी तमाम बिंदुओं ध्यान में रखकर केंद्र निर्धारण की दिशा में काम किया है। इसकी प्रक्रिया अंतिम दौर में है। दिसंबर के पहले हफ्ते में पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा प्रस्तावित है और आयोग के पास परीक्षा पर निर्णय लेने के लिए एक माह का वक्त बचा है। अभ्यर्थी भी असमंजस में हैं और उनकी तैयारी प्रभावित हो रही है। ऐसे में आयोग इसी हफ्ते परीक्षा के आयोजन को लेकर कोई निर्णय ले सकता है।