संगीत की दुनिया के ऐसे गिने-चुने सितारों में शामिल सुदेश, जिन्होंने बिना संगीत सीखे ही अपनी गायकी से पूरी दुनिया को दीवाना बना दिया ने कहा, मुझे किसी की भी आवाज में गाना मुश्किल नहीं लगता। फिल्म ''''सौदागर'''' का गीत ''''इमली का बूटा'''' मैंने और मोहम्मद अजीज ने मिलकर गाया था।
बॉलीवुड के मशहूर पार्श्वगायक सुदेश भोसले का कहना है, लोगों के चेहरे पर मुस्कुराहट लाना ही मेरा मकसद है। कोई भी संगीत खराब नहीं होता, बस गीतकार ऐसा गीत लिखें, जिसे परिवार के सदस्यों के साथ लोग सुन सकें। पथरचट्टी रामलीला कमेटी के न्योते पर रामनवमी महोत्सव में शामिल होने आए सुदेश ने अमर उजाला के साथ बातचीत में प्रयागराज और बिग बी अमिताभ बच्चन से जुड़े कई संस्मरण साझा किए।
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कहा, हमारी आवाजें तो बहुत मिलती-जुलती हैं, लेकिन अमिताभ बच्चन के लिए गाने का संयोग फिल्म ''''अजूबा'''' में बना। तब मैंने पहली बार उन्हें देखा था। फिल्म ''''हम'''' का गीत जुम्मा, चुम्मा'''' खूब हिट हुआ। एक बार 90 के दशक में मेरा गाना सुनकर जया बच्चन ने मुझे सौ रुपये का पुरस्कार भी दिया था।
संगीत की दुनिया के ऐसे गिने-चुने सितारों में शामिल सुदेश, जिन्होंने बिना संगीत सीखे ही अपनी गायकी से पूरी दुनिया को दीवाना बना दिया ने कहा, मुझे किसी की भी आवाज में गाना मुश्किल नहीं लगता। फिल्म ''''सौदागर'''' का गीत ''''इमली का बूटा'''' मैंने और मोहम्मद अजीज ने मिलकर गाया था।
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मेरा हिस्सा राजकुमार पर फिल्माया गया। इसी तरह गीत ''''पी ले, पी ले, ओ मेरे राजा'''' देखकर ऐसा लगता है कि राजकुमार साहब खुद गा रहे हैं। फिलहाल के काम और प्रयागराज से रिश्ते पर कहा, बीते कुछ समय में एड फिल्म के लिए काम कर रहा हूं, मेरा बेटा सिद्धांत भी इसमें सहयोग कर रहा है। कई वर्ष पूर्व प्रयागराज आया था। आज फिर अपने हीरो अमिताभ बच्चन के शहर आकर मुझे काफी अच्छा लगा। बोले, अगर मुझे बृहस्पतिवार को मौका मिलता है, तो गंगा-यमुना का संगम देखने जाऊंगा। वहीं अगर मेरे फैंस मुझे बुलाते हैं तो महाकुंभ के दौरान यहां आना मुझे अच्छा लगेगा।