रेलवे द्वारा चीन की कंपनी को टर्मिनेट करने के बाद ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर ( ईडीएफसी) के सिग्नलिंग का काम पिछड़ गया है। अब ईडीएफसी के 417 किलोमीटर के सिग्नलिंग के काम के लिए डीएफसीसीआईएल ने दूसरी कंपनी की तलाश शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि अगस्त माह के पहले सप्ताह में डीएफसीसीआईएल टेंडर निकाल देगा।
खास बात यह है कि इस बार टेंडर प्रक्रिया में भारतीय कंपनी को वरीयता दी जा सकती है। हालांकि इस प्रक्रिया में कुछ विदेशी कंपनी भी शामिल हो सकती हैं। इस बीच ईडीएफसी का काम पूरा होने की मियाद भी एक वर्ष के लिए बढ़ा दी गई है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेट ( डीएफसीसीआईएल) ने कानपुर से पंडित दीन दयाल उपाध्याय तक 417 किलोमीटर रूट की सिग्नलिंग के लिए 471 करोड़ रुपये का टेंडर किया था। बीजिंग रेलवे रिसर्च एंड सिग्नल कम्युनिकेशन कंपनी को यह टेंडर मिला था। कार्य की धीमी गति की वजह से पिछले माह ही इस कंपनी से काम छीन लिया गया।
माह भर बाद अब डीएफसीसीआईएल के प्रबंध निदेशक अनुराग सचान ने चीनी फर्म का अनुबंध समाप्त कर दिया है। इसके पूर्व लॉक डाउन लगने के पूर्व यह काम मार्च 2021 तक पूरा होना था। बाद में उसे बढ़ाकर जून 2021 कर दिया। लेकिन अब चीनी कंपनी का अनुबंध समाप्त होने एवं नई कंपनी के चयन की टेंडर प्रकिया शुरू न होने की वजह से डीएफसीसीआईएल ने इस कार्य को पूरा करने की मियाद बढ़ा दी है।
डीएफसीसीआईएल के सीपीआरओ वेद प्रकाश बताते हैं कि अब दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अगले माह के पहले सप्ताह में टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। दशहरा के बाद यहां सिग्नलिंग का काम शुरू हो सकता है।
कई भारतीय कंपनी हैं लाइन में
डीएफसीसीआई एल ने चीनी कंपनी का ठेका समाप्त करने के बाद अगले माह की शुरूआत में टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। ठेका इस बार किसी भारतीय कंपनी को दिया जा सकता है। चर्चा है कि इस फेहरिश्त मे भारतीय कंपनी मेधा, डीएलडब्ल्यू के नाम मुख्य रूप से शामिल है। इसके अलावा कनाडा की कंपनी बॉमबारडियर, फ्रांस की एल्ट्राम आदि के नाम भी प्रमुखता से लिए जा रहे हैं।
पीएमओ और रेल मंत्रालय से नहीं मिला ठेकेदारों को जवाब
चीनी कंपनी का अनुबंध समाप्त हो जाने के बाद उससे जुड़े ठेकेदारों का करोड़ों रुपये फंस गया है। बकाया भुगतान को लेकर पिछले दिनों प्रदर्शन कर चुके ठेकेदारों ने पीएमओ को ट्वीट और रेल मंत्रालय को ई मेल के माध्यम से अपना दुख बताया। हालांकि पीएमओ और रेल मंत्रालय से ठेकेदारों को अभी कोई जवाब नहीं मिला है। ठेेकादारों का कहना है कि शनिवार एवं रविवार को रेल मंत्रालय बंद रहता है। ऐसे में वह अभी सोमवार तक का इंतजार करेंगे। कोई जवाब न मिला तो वह न्यायालय की भी शरण ले सकते हैं।