कुलपति समेत फरार आरोपियों के मोबाइल बंद
शुआट्स में अवैध नियुक्ति व सरकारी धन के अनियमित भुगतान के मामले में कुलपति आरबी लाल समेत फरार अन्य आरोपियों ने अपने मोबाइल बंद कर लिए हैं। इनमें कुलपति के दोनों भाई सुनील बिहारी लाल व विनोद बी लाल के अलावा कुलाधिपति जेए ऑलिवर, तत्कालीन रजिस्ट्रार अजय कुमार लाॅरेंस, प्रतिकुलपति सुनील बी लाल, तत्कालीन निदेशक एचआरएएम बिनोद बिहारी लाल, रजिस्ट्रार रॉबिन एल प्रसाद, तत्कालीन वित्त निदेशक स्टीफेन दास, डीन डाॅ. मोहम्मद इम्तियाज, तत्कालीन निदेशक एचआरएम रंजन ए जाॅन शामिल हैं।
रोक दिया गया था वेतन
शिकायतें मिलने के बाद अनुदानित पदों पर नियुक्त शिक्षकों व कर्मचारियों का वेतन भी कुछ समय के लिए रोक दिया गया था। दरअसल शासन की ओर से शुआट्स को दिया जाने वाला अनुदान वेतन भत्तों व अन्य खर्चों के लिए दिया जाता था। इसके लिए संबंधित बिलों पर कमिश्नर के हस्ताक्षर होते थे और इसके बाद ही कोषागार से भुगतान किया जाता था। तत्कालीन कमिश्नर ने शासन को भेजे गए पत्र में इसका भी जिक्र किया था। उन्होंने विवि प्रबंधन की ओर से जांच में सहयोग न करने के साथ ही यह भी बताया था कि अनुदानित बिलों पर हस्ताक्षर के लिए शुआट्स के वित्त नियंत्रक व रजिस्ट्रार उपस्थित होते थे। लेकिन वह वित्तीय अनियमितता(एक्सिस बैंक स्थित संस्था के खाते से 22.29 करोड़ के गबन) मामले में जेल में हैं। इन कारणों से विवि की ओर से प्रस्तुत अनुदान संबंधी वेतन भत्ते व अन्य बिलों पर प्रतिहस्ताक्षर की कार्यवाही नहीं हो पा रही है। जबकि संबंधित शिक्षकों व कर्मचारियेां की ओर से वेतन की मांग की जा रही है।
शुआट्स में प्रशासनिक भवन के आठ कमरों में मिला ताला
नैनी स्थित सैम हिग्गिनबाॅटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलाॅजी एंड साइंसेज (शुआट्स) में अवैध नियुक्ति मामले की जांच शनिवार से शुरू हो गई। इसके तहत प्रति कुलपति सर्वजीत हर्बट व सहायक वित्त नियंत्रक अशोक संदीप सिंह को कस्टडी रिमांड पर लिया गया। उन्हें लेकर पुलिस संस्थान में पहुंची तो वहां प्रशासनिक भवन के आठ कमरों में ताला लटका मिला। जिस पर पुलिस नोटिस देकर चली आई। उधर, कस्टडी रिमांड के दौरान दोनों आरोपियों से आठ घंटे तक गहन पूछताछ की गई।
प्रति कुलपति व सहायक वित्त नियंत्रक को सुबह आठ बजे कस्टडी रिमांड पर लिया गया। नैनी पुलिस की एक टीम ने केंद्रीय कारागार नैनी पहुंचकर अभिरक्षा में ले लिया और फिर उन्हें थाने ले जाया गया। वहां उनसे कई बिंदुओं पर पूछताछ की गई। कुलपति आरबी लाल व उनके दोनों भाइयों समेत फरार सभी आरोपियों के बारे में जानकारी मांगी गई।
दोपहर एक बजे के करीब उन्हें लेकर पुलिस टीम शुआट्स पहुंची। दरअसल पुलिस ने 69 पदों पर हुई अवैध नियुक्ति संबंधी मामले में सवाल पूछे तो प्रति कुलपति व सहायक वित्त नियंत्रक ने गोलमोल जवाब दिए। यह भी कहा कि इस संबंध में दस्तावेजों को देखकर ही कुछ बताया जा सकता है।
कहा कि विवि में चलने पर वह दस्तावेज उपलब्ध करा सकते हैं। इसी पर पुलिस उन्हें लेकर शुआट्स में पहुंची थी। हालांकि यहां प्रशासनिक भवन के आठ कमरों में ताला लटका मिला। इससे पुलिस कोई दस्तावेज हासिल नहीं कर पाई। जिसके बाद वहां मौजूद विवि से संबंधित लोगों को एक नोटिस दिया गया। इसमें निर्देशित किया गया कि 69 पदों पर अवैध नियुक्ति के आरोपों से संबंधित मामले की विवेचना प्रचलित है।
इसके लिए जांच पड़ताल के लिए संबंधित दस्तावेजों को यथाशीघ्र उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद पुलिस दोनों आरोपियों को लेकर वापस थाने चली आई। इसके बाद नैनी थाने में करीब एक घंटे तक दोनों से फिर पूछताछ की गई। इस दौरान विवि में तैनाती के बाद से उनके कार्यकाल के अलावा अन्य कई बिंदुओं पर जानकारी ली गई। फिर रिमांड अवधि खत्म होने पर शाम पांच बजे से पहले उन्हें नैनी जेल ले जाकर दाखिल कर दिया गया।
परिसर में दो घंटे तक चलती रही जांच पड़ताल
शनिवार को करीब दो घंटे तक पुलिस परिसर में रहकर जांच पड़ताल करती रही। पुलिस करीब एक बजे शुुआट्स में पहुंची थी। दो घंटे तक वहां रहकर छानबीन करने के बाद टीम तीन बजे के करीब वापस चली गई। इस दौरान मौके पर मिले कुछ कर्मचारियों से भी बातचीत की। हालांकि वह कोई जानकारी होने की बात से इन्कार करते रहे।
दूसरे मामले में भी बनवाया जाएगा रिमांड
पुलिस सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तार कर जेल भेजे गए दोनों आरोपियों का जल्द ही नैनी थाने में दर्ज दूसरे मुकदमे में भी रिमांड बनवाया जा सकता है। इसमें शासन की ओर से अनुदान के रूप में दिए गए 5.56 करोड़ रुपये के भुगतान में अनियमितता के आरोप हैं। विवेचक नैनी इंस्पेक्टर बृजेश सिंह ने इस मामले की विवेचना शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि मामला वित्तीय हेराफेरी के आरोपों से संबंधित है, ऐसे में दस्तावेजी साक्ष्यों का संकलन जरूरी है। इसके बाद अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही जेल भेजे गए प्रति कुलपति व सहायक वित्त नियंत्रक का रिमांड इस मुकदमे में बनवाया जाएगा।