सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता पुनीत कुमार गुप्ता की ओर से कहा गया कि सिविल प्रक्रिया संहिता के अध्याय सात के नियम 11 के तहत यह सुनवाई नहीं की जा सकती है। पूजा स्थल अधिनियम के तहत भी यह प्रतिबंधित है। वक्फ अधिनियम भी इस पर लागू होता है। लिहाजा, मौजूदा स्थिति में कोर्ट कमिश्नर नियुक्त नहीं किया जा सकता है। पहले निचली अदालत में दाखिल वादों की पोषणीयता तय हो जाए, उसके बाद ही आगे कुछ आदेश पारित किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद मामले में सारे केसों को जिला जज के यहां सुनवाई का आदेश दिया था। मंदिर पक्ष की ओर से मुस्लिम पक्ष की दलीलों पर आपत्ति जताई गई। अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह, सहित कई अन्य पक्षकारों ने अपनी दलील दी। तीन घंटे तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया।