मुस्लिम पक्ष की दलील थी कि सभी वादों में मांगी गईं राहतें अलग और असमान हैं। ऐसे में इन्हें एक साथ नहीं सुना जा सकता। वहीं, श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह ने दलील दी थी कि मुस्लिम पक्ष मामले को उलझाए रखने के लिए रिकॉल अर्जी दाखिल की है। वाद की पोषणीयता पर फैसला आ चुका है। अब मामले के वाद बिंदु तय किए जाने चाहिए। हिंदू पक्ष के अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने दलील दी कि न्यायालय के पास वादों की एक साथ सुनवाई करने की शक्ति है। वह अपने विवेकानुसार ने एक समान वादों को एक साथ सुनवाई करने का आदेश पारित कर सकता है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष आशुतोष पांडेय की ओर से लिखित में आपत्ति दाखिल कर मुस्लिम पक्ष के रिकॉल आवेदन का विरोध किया गया। हिंदू पक्ष की ओर से अन्य कई अधिवक्ताओं ने रिकॉल आवेदन का विरोध करते हुए दलील प्रस्तुत की थी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 16 अक्तूबर को ऑर्डर रिजर्व कर लिया था। बुधवार को अदालत ने मुस्लिम पक्ष के रिकॉल आवेदन को खारिज कर दिया।
अब तय होंगे वाद बिंदू
मामले की सुनवाई छह नवंबर तय की गई है। अब वाद बिंदू तय किए जाएंगे। इसके बाद ही बिंदू वार मामले की सुनवाई होगी। अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने पहले ही अदालत में वाद बिंदू दाखिल कर दिया है। साथ ही इनकी प्रति शाही मस्जिद ईदगाह व सुन्नी बोर्ड को उपलब्ध करा दी है।
ऑर्डर का अवलोकन कर लेंगे फैसला
ऑर्डर का अवलोकन करेंगे। देखेंगे क्या-क्या वैधानिक कमियां हैं। इसके बाद जरूरत पड़ी तो सक्षम अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। - अधिवक्ता तनवीर अहमद, मुस्लिम पक्ष
ये था मामला
हिंदू पक्ष ने सभी विवादों का एकत्रीकरण कर तत्काल वाद बिंदुओं को तय करके सुनवाई की जाए। मुस्लिम पक्ष की तरफ से इसका विरोध किया गया। कोर्ट में मुस्लिम पक्ष ने सभी मुकदमों की अलग- अलग सुनवाई करने की मांग कोर्ट से की थी। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सुरक्षित रख लिया था। आज हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष के आवेदन को खारिज कर दिया। अब सभी मुकदमे एक साथ चलाए जाएंगे।