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श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामला: ईदगाह पक्ष ने कहा- गलत तथ्यों के आधार पर दायर किया गया है वाद

Thu, 16 May 2024 06:53 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मंदिर पक्ष की ओर से माननीय सर्वोच्च न्यायालय, मद्रास उच्च न्यायालय सहित विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि वादी भगवान के उपासक होने के नाते उनके हक व उनकी संपत्ति की रक्षा हेतु वाद दायर करने का अधिकारी है। इसका निर्धारण वाद बिंदु बनाकर विचारण करने के उपरांत ही न्यायोचित है।
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श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में श्रीकृष्ण जन्मभूमि व शाही ईदगाह विवाद मामले में वाद की पोषणीयता को लेकर सुनवाई जारी है। बृहस्पतिवार को ईदगाह पक्ष के अधिवक्ता ने दलीलें प्रस्तुत करते हुए कहा कि गलत तथ्यों के आधार पर यह वाद दायर किया गया है। मंदिर पक्ष को वाद दायर करने का हक नहीं है। न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन की कोर्ट में मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई की अगली तिथि 20 मई निर्धारित की गई है।

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वाद 15 पर ईदगाह पक्ष के अधिवक्ता ने दलीलें पेश करते हुए कहा कि यह वाद लंबे समय बाद दाखिल किया गया है, जो परिसीमा अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है। आगे कहा कि धार्मिक स्थल का स्वरूप परिवर्तित करने की नीयत से न्यायालय के समक्ष गलत तथ्यों के आधार पर वाद दाखिल किया गया है। मंदिर पक्षकार की ओर से 1669 से आजतक प्रश्नगत स्थान पर ईदगाह मस्जिद का होना व कब्जा होना स्वीकार किया गया है। उपासना अधिनियम के प्रावधानों से यह वाद बाधित है।

वहीं, मंदिर पक्ष की ओर से माननीय सर्वोच्च न्यायालय, मद्रास उच्च न्यायालय सहित विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि वादी भगवान के उपासक होने के नाते उनके हक व उनकी संपत्ति की रक्षा हेतु वाद दायर करने का अधिकारी है। इसका निर्धारण वाद बिंदु बनाकर विचारण करने के उपरांत ही न्यायोचित है। साथ ही यह भी कहा कि वादी मुख्य रूप से बालरूप देवता हैं अत: परिसीमा के प्रावधान मामले पर लागू नहीं होते हैं। पूजा स्थल की प्रकृति को वास्तविक रूप से निर्धारण के लिए वाद का विचारण आवश्यक है।

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वहीं अधिवक्ता सत्यवीर सिंह ने कहा कि प्रश्नगत स्थल मदनमोहन मालवीय आदि की ओर से खरीदी गई जमीन है। इस पर पहले भी कई बार न्यायालय में केस चल चुका है। इसलिए इस मामले में उपासना अधिनियम लागू नहीं होगा। आशुतोष पांडेय ने इनपर्सन कोर्ट में कहा कि प्रतिवादी 1 और 2 की ओर से आदेश 7 नियम 11 पर दिए गए प्रार्थना पत्र पर प्रतिवादी गणों के हस्ताक्षर नहीं है।

साथ ही कहा कि प्रार्थना पत्रों के साथ शपथ पत्र न्यायालय में दाखिल नहीं किया गया है। बिना हस्ताक्षर और बिना शपथपत्र के प्रार्थनापत्र कानूनी रूप से शून्य है। अन्य कई दलीलें दीं। वहीं, वाद 4 में अधिवक्ता विनय शर्मा ने उपासना अधिनियम, वक्फ अधिनियम आदि पर दलीलें पेश की। श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट और संस्थान के अधिवक्ता हरेराम त्रिपाठी, तसनीम अहमदी (वीडियो कांन्फ्रेंसिंग), नसीरुज्जमां, महेंद्र प्रताप सिंह, मारकंडेय राय, प्रणव ओझा आदि रहे।

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