इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कर्मचारियों की हड़ताल के कारण बृहस्पतिवार को कोई काम नहीं हो सका। कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. संतोष सहाय के साथ मारपीट की घटना के बाद कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों के समर्थन में छात्रों के आने के बाद परिसर में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। छात्रों-कर्मचारियों ने संयुक्त परिषद का गठन करके आंदोलन को आगे ले जाने का फैसला किया है। कर्मचारियों ने शुक्रवार से शुरू होने वाली प्रयोगात्मक परीक्षाओं के बहिष्कार का फैसला किया है। कुछ विभागों ने शुक्रवार को शुरू होने वाली प्रयोगात्मक एवं आंतरिक परीक्षाएं स्थगित भी कर दी हैं। हड़ताल से 16 मार्च से शुरू होने वालीं विवि की वार्षिक परीक्षाएं प्रभावित हो सकती हैं।
संयुक्त परिषद की अनिश्चितकालीन हड़ताल के दूसरे दिन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. संतोष सहाय पर किए गए हमले की निंदा की गई। सभा की अध्यक्षता कर रहे इविवि छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित कुमार मिश्र ने कहा कि कर्मचारियों का साथ उनकी अंतिम लड़ाई तक दिया जाएगा। छात्रसंघ उपाध्यक्ष आदिल हमजा ने कर्मचारियों के हित के लिए हमेशा साथ रहने की बात कही। कर्मचारियों की मांगों का समर्थन भाजपा नेता हर्ष वर्द्घन बाजपेई ने भी किया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को मानव संसाधन विकास मंत्रालय, पीएमओ, भाजपा अध्यक्ष के पास तक पहुंचाने की बात कही। भाजपा नेता सुरेंद्र चौधरी, सूर्य प्रकाश मिश्र ने भी कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया।
सभा को संबोधित करने वालों में डॉ. संतोष सहाय, छोटेलाल मौर्य, हरेकृष्ण द्विवेदी, भीम सिंह चंदेल, सुदेश ओझा, महेंद्र बहादुर सिंह, विकास स्वरूप, गुलाब चंद्र, अशर्फीलाल, आनंद सिंह निक्कू, इमदाद, अदनान, मुश्ताक अहमद, संतोष बाबू मिश्र आदि शामिल रहे। ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन के जिला कार्यालय पर हुई बैठक में जिलाध्यक्ष जय प्रकाश विवि के कर्मचारियों के साथ मारपीट की निंदा की है। एबीवीपी ने मारपीट करने वाले छात्र नेता से अपने किसी प्रकार के रिश्ते से इनकार किया है। एबीवीपी के महानगर अध्यक्ष उमेश द्विवेदी, रिंकू पयासी ने संयुक्त रूप से जारी बयान में कहा कि इस छात्र नेता को उनकेसंगठन से दो वर्ष पूर्व निकाल दिया गया था।
इलाहाबाद विवि अध्यापक संघ ने विवि कर्मचारी संघ के अध्यक्ष के साथ हुई मारपीट की घटना की निंदा की है। ऑटा ने विवि परिसर में किसी प्रकार की अराजकता फैलाने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग कुलपति से की। ऑटा कर्मचारियों की न्याय संगत मांगों का समर्थन करता है। छात्रों एवं कर्मचारियों की संयुक्त परिषद ने ऑटा की ओर से छात्र हित में आंदोलन पर पुनर्विचार की अपील को नामंजूर कर दिया गया।