बैंकों में पर्याप्त मात्रा में छोटे नोट पहुंचाने में आरबीआई नाकाम रहा। इससे बैंकों के बाहर घंटों लाइन लगाए लोगों को बिना पैसा वापस लौटना पड़ रहा है। दो हजार की नोट देने पर लोगों की बैंककर्मियों से रोजाना नोंकझोंक भी हो रही है। बाजार में कोई दो हजार का फुटकर देने को तैयार नहीं है। इससे लोगों को भारी परेशानी का सामना कर पड़ रहा है।
शहर के बैंकों में भीड़ तो कम हुई है, परंतु छोटे नोट नहीं मिलने से लोगों की नाराजगी कायम है। छोटी नोट नहीं होने और करेंसी चेस्ट से कम पैसा मिलने से बैंक वाले चेक पर भरे एमाउंट का भी भुगतान नहीं कर रहे हैं।
एसबीआई, पीएनबी, सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, इलाहाबाद बैंक के शहर में करेंसी चेस्ट हैं, इन बैंकों को छोड़कर शेष बैंकों को दूसरे बैंकों के करेंसी चेस्ट से नोट लेने पड़ते हैं। यही कारण है कि करेंसी चेस्ट वाले बैंकों को छोड़कर शेष में पैसे की लगातार कमी बनी है। इन बैंकों को आरबीआई से पैसा नहीं मिलने से परेशानी बढ़ी है।
पीएनबी अलोपी बाग शाखा में पैसा निकालने गए दिव्यांग आनंद कुमार लाल श्रीवास्तव ने शाखा प्रबंधक आरएन पंथारी पर मारपीट कर भगाने का आरोप लगाया है। आरोप लगाने वाले अमर उजाला कार्यालय आकर बताया कि वह बैंक में पैसा निकालने गए थे, इस दौरान एक विकलांग और वहां पहुंच गया। दोनों लोगों ने मिलकर 600 रुपये खाते से निकालने के लिए बाउचर भरा था। उनका कहना है कि शाखा प्रबंधक ने कहा कि बैंक में मात्र दो हजार की नोट है, दो बजे के बाद आओ तो छोटी नोट मिल जाएगी। दो बजे पहुंचने पर शाखा प्रबंधक ने उनके साथ मारपीट की, उन्हें धक्का देकर बाहर करने के साथ पुलिस बुला ली। बैंक पहुंची दारागंज पुलिस उन्हें थाने लाई और चाय पिलाकर छोड़ दिया।
कैश भुगतान के मामले में एटीएम सेवा में लगातार सुधार हो रहा है। लेकिन लोग वहां नहीं जा रहे हैं। क्यों कि ज्यादातर एटीएम से दो हजार की नोट ही निकल रही है।
बैंकों में भले ही पैसा मिलने की प्रक्रिया आसान हो रही हो, परंतु डाकघरों में पैसे का अकाल पहले की तरह ही बना रहा। डाकघरों ने पैसा नहीं बदला, कैश का भुगतान नहीं किया, मात्र कैश जमा करने का काम होता रहा।
इलाहाबाद में डाकघरों ने पैसे का भुगतान एवं नोट बदलने की प्रक्रिया से अपने को दूर रखा है। दूसरी ओर दूसरे शहरों में डाकघर अस्पताल में भर्ती अपने ग्राहकों को सुविधा देने के लिए स्वयं पहुंचकर पैसा बदल रहे हैं। पूर्व में इलाहाबाद में निदेशक डाक सेवाएं रहे केके यादव ने इस दिशा में पहल की है। इन दिनों वह जोधपुर में निदेशक डाक सेवाएं के पद पर तैनात हैं, उन्होंने अस्पताल अपनी पूरी टीम के साथ पहुंचकर लोगों को पैसा उपलब्ध कराया।