ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्रा के अनुसार 19 वर्ष बाद पितृपक्ष के बाद अधिक मास लगने से इस बार का नवरात्र भी खास होगा। तिथि क्षय न होने से यह नवरात्र पूरे नौ दिन का होगा। 13 अक्तूबर को अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है, तो 16 अक्तूबर को अधिक मास की अमावस्या होगी। इसी दिन अधिक मास खत्म होगा। 17 तारीख को आश्विन मास के आरंभ के साथ ही शारदीय नवरात्र में जगत जननी मां जगदंबा की आराधना के लिए कलश स्थापना होगी।
20 अक्तूबर को अंगारक विनायकी चतुर्थी और 24 अक्तूबर को दुर्गा अष्टमी मनाई जाएगी। इस दिन देवी दुर्गा की विशेष आराधना का महत्व है। इसी तरह 25 अक्तूबर को दुर्गा नवमी,27 अक्तूबर को पापांकुशा एकादशी और 30 अक्तूबर को शरद पूर्णिमा पर महालक्ष्मी की पूजा होगी।