आजादी के समय 80 करोड़ गायें, आज मात्र 2-3 करोड़ शुद्ध देसी गायें बची हैं
शंकराचार्य ने कहा कि आजादी के समय इस देश में लगभग 80 करोड़ गायें थीं और केवल 20 करोड़ मनुष्य। आज 150 करोड़ मनुष्य हैं और मुश्किल से 17 करोड़ पशु, जिनमें अधिकतर विदेशी नस्ल (गवै) या संकरित हैं। शुद्ध देसी गाय, अपनी विशिष्ट सास्ना और ककुद् (कूबड़) के साथ अधिक से अधिक 2-3 करोड़ बची होंगी। और इनमें से रोज 80,000 काटी जा रही हैं। 'हिसाब लगाइए। इस दर पर एक साल में हर शुद्ध देसी गाय समाप्त हो जाएगी। अगली पीढ़ी चित्र में गाय देखेगी। हम पहले से ही उस अवस्था में हैं जहां घरों में गाय नहीं रख पाते तो हम छोटी गाय की मूर्तियां दे रहे हैं पूजा के लिए। आज मूर्ति, कल फोटो, परसों वो भी धुंधली हो जाएगी।
मुस्लिमों ने गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की उठाई मांग, शंकराचार्य को सौंपा ज्ञापन
गविष्टी यात्रा के दौरान सोमावर को शहर के रामबाग साउथ मलाका क्षेत्र में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज जी का भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सैकड़ों लोगों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन को महाराज जी को सौंपकर गौ माता को “राष्ट्रमाता” घोषित किए जाने की मांग की गई। इस पहल को यात्रा का एक महत्वपूर्ण एवं सामाजिक सौहार्द का प्रेरणादायक क्षण माना जा रहा है।