कहा कि हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना मेरे लिए असंभव नहीं लगती है। कहा कि रोम में ईसा मसीह की प्रतिमा वैष्णव तिलक से युक्त है। उस प्रतिमा के पीछे पर्दा लगा रखा है। पर्दा हटाकर देखेंगे तो वैष्णव तिलक के साथ उनका स्वरूप दिखेगा। कहा कि ईसा मसीह भी हिंदू के पक्षधर थे। एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि दर्शन, विज्ञान और व्यवहार में सामंजस्य साधने वाला केवल सनातन वैदिक आर्य सिद्घांत ही है।
उन्होंने पूरी पृथ्वी की आयु के बारे में भी भक्तों को जानकारी दी। कहा कि आधुनिक विज्ञान लाखों वर्ष तक वैदिक विज्ञान से मार्गदर्शन ले सकता है। कहा कि विश्व बैंक के प्रतिनिधि ने भी अर्थशास्त्र से जुड़ी गुत्थियों को मेरे पास आकर सुलझाया था। कहा कि अर्थशास्त्र की गुत्थी भी भारत में आकर ही सुलझती है। एक अन्य सवाल के जवाब में पुरी शंकराचार्य ने कहा कि माता-पिता सन्यासी के लिए भी पूज्य होते हैं। यहां तक माता पिता की महिमा है। पुरी शंकराचार्य ने माता शबरी को ब्रह्म बताया।