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आठ दिन के भीतर सात हत्याएं, दहला जिला

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seven murder in eight days in praygraj
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वारदात दर वारदात कर बदमाशों ने फैलाई सनसनी
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पुलिस के सामने पेश की खुली चुनौती, अफसर परेशान
प्रयागराज। बेखौफ हो चुके अपराधियों ने एक के बाद एक वारदातों को अंजाम देकर जिले में आतंक मचा रखा है। हाल यह है कि पिछले आठ दिनों के भीतर ही सात हत्याएं हो चुकी हैं जिससे दहशत का माहौल कायम हो गया है।
बदमाशों के सामने पुलिस ने सबसे पहली चुनौती 23 अक्तूबर को पेश की जब फाफामऊ में आयकर विभाग के कर्मचारी संजय पाल की गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना को दो दिन ही बीते थे 26 अक्तूबर की रात कैंट थाना क्षेत्र से 500 मीटर की दूरी पर एक और सनसनीखेज वारदात हुई। यहां आयकर विभाग कर्मचारी के 16 वर्षीय बेटे राज प्रसाद उर्फ गौरव र्की ईंट-पत्थर से कूंचकर मार डाला गया। 28 से 29 अक्तूबर के बीच 24 घंटे के भीतर चार लोगों की हत्या की वारदातें सामने आने के बाद सनसनी फैल गई। शिवकुटी में दोहरा हत्याकांड अंजाम दिया गया तो नवाबगंज व दारागंज में भी दो लोगों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। 30 अक्तूबर को भी नवाबगंज में युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। उधर बृहस्पतिवार भोर में करेली मेें अधिवक्ता मो. इदरीश की हत्या कर दी गई जबकि लालापुर में किशोरी की गला घोंटकर हत्या कर दी गई। आठ दिन के भीतर हत्या की सात वारदातें होने के बाद जिले में दहशत का माहौल कायम हो गया है।
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पुलिस-अपराधी के गठजोड़ को तोड़ना चुनौती
जानकारों का कहना है कि एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने तैनाती के बाद से ही कड़े कदम उठाए। उन्होंने लगातार शिकायतों के बाद क्राइम ब्रांच के नकारा सिपाहियों को हटाने के साथ ही कई थानेदारों पर भी कार्रवाई की। हालांकि पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार लाना उनके लिए अब भी बड़ी चुनौती है। फिर चाहे कर्नलगंज में अस्पताल के गार्ड को गोली मारने की वारदात हो या फिर कैंट में हत्या, दोनों ही मामलों में पुलिस की लापरवाही की बात सामने आई थी। दोनों ही घटनाओं में भुक्तभोगी के परिजनों का आरोप था कि पूर्व में शिकायत के बावजूद पुलिस ने कार्रवाई नहीं की।
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चिह्नित अपराधियों पर कार्रवाई में नाकाम
उधर अपराधिक घटनाओं के लिए गठित विशेष टीमों के नकारापन से भी बढ़ते अपराध पर लगाम लगा पाना मुश्किल हो रहा है। व्यापारी सुरक्षा प्रकोष्ठ व स्वाट टीम इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। दोनों ही टीमें बड़े मामलों के खुलासे में तो नाकाम हैं ही, चिह्नित अपराधियों को पकड़ पाने में भी दोनों कामयाब नहीं हो पाईं। नतीजा अपराधी एक के बाद एक वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। बता दें कि व्यापारी सुरक्षा प्रकोष्ठ को मऊआइमा बैंक लूट की वारदात में लगाया गया था लेकिन यह खुलासे में नाकाम रही और प्रतापगढ़ पुलिस ने मामला खोल दिया। उधर डेढ़ करोड़ की चोरी में लगी स्वाट टीम भी अब तक मामले के मुख्य आरोपियों तक पहुंच पाने में नाकाम रही है। इसके साथ ही कर्नलगंज, शिवकुटी, धूमनगंज, करेली, जार्जटाउन, दारागंज के चिह्नित अपराधियों को भी पकड़ने में टीम के कारिंदे कोई पहल नहीं कर रहे।
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