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Prayagraj : इलाहाबाद संग्रहालय की सात बौद्ध मूर्तियां न्यूयार्क से भेजी गईं दक्षिण कोरिया

Sun, 04 Feb 2024 11:35 AM IST
विनोद सिंह अनूप ओझा, प्रयागराज

सार

महात्मा गौतम बुद्ध के समय के के जीवन दर्शन को समझने के लिए इलाहाबाद संग्रहालय में रखी गईं बौद्धकालीन मूर्तियां सात समंदर पार भेजी जाएंगी। यह अवशेष पुरातत्व विभाग को विभिन्न स्थानों पर खुदाई के दौरान मिले थे।  
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भरहुत स्तूप की इलाहाबाद संग्रहालय में रखी मूर्तियां। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद संग्रहालय की बौद्धकालीन मूर्तियां दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय संग्रहालय में प्रदर्शित की जाएंगी। फिलहाल, ये मूर्तियां अमेरिका के न्यूयार्क स्थित मेट म्यूजियम (न्यूयार्क मेट्रोपोलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट) की शोभा बढ़ा रही हैं। यहां से इन्हें तीन महीने के लिए दक्षिण कोरिया भेजा जा रहा है।

बौद्धकालीन कला-दर्शन से दुनिया को परिचित कराने के लिए भारत का अमेरिका और दक्षिण कोरिया से संस्कृति मंत्रालय के जरिए करार हुआ है। संस्कृति मंत्रालय की ओर से गठित नोडल एजेंसी नेशनल म्यूजियम दिल्ली को इलाहाबाद संग्रहालय की ओर से सात बौद्ध मूर्तियां हस्तांतरित की गई हैं। इनमें मध्य प्रदेश के भरहुत में 250 ईसा पूर्व यानी दूसरी शती के स्तूप के खंडहरों से प्राप्त सात कला अवशेष हैं।

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कुछ महीने पहले इन कलाकृतियों को अमेरिका के न्यूयार्क स्थित मेट्रोपोलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट की ओर से बौद्ध धर्म पर लगाई गई प्रदर्शनी की दीर्घा में सजाया गया था। ट्री एंड सर्पेट: अर्ली बुद्धिज्म आर्ट इन इंडिया विषयक इस प्रदर्शनी में इन प्रस्तर प्रतिमाओं को रखा गया, जहां 20 लाख से अधिक कलाओं के बीच इन्हें दुनिया भर के कलाविदों और शोधार्थियों की ओर से न सिर्फ देखा गया, बल्कि बौद्धकालीन संदर्भों को समझने के लिए सहायक भी माना गया।

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इन कलात्मक प्रस्तर स्तंभों में भरहुत स्तूप की दीवारों की रेलिंग के कलात्मक टुकड़े हैं। इनसे पता चलता है कि उस काल में राजा-रानी और अन्य लोग किस तरह विहार करते थे। इसके साथ प्रारंभिक बौद्ध पूजा चिह्न, चक्र, चरणपाद, जातक कथाओं के आधार पर बुद्ध के जीवन का निरूपण भी इन प्रस्तर कलाओं में दर्शाया गया है।

स्तूप की दीवार के प्रस्तर खंडों में बोधिसत्व के क्रमिक विकास को भी देखा-समझा जा सकता है। यह कृतियां उस कालखंड की पारिस्थितिकी को भी रेखांकित करती हैं। गौतम बुद्ध के जीवन-दर्शन और उस दौर के कालक्रम को समझने के लिए इन कलाकृतियों को सात समंदर पार प्रदर्शनी का हिस्सा बनाया गया।

 

संस्कृति मंत्रालय से हुए करार के बाद नोडल एजेंसी नेशनल म्यूजियम दिल्ली की ओर से इलाहाबाद संग्रहालय की सात बौद्ध प्रतिमाओं को न्यूयार्क के लिए भेजा गया था। अब वहां से इन मूर्तियों को तीन महीने के लिए दक्षिण कोरिया भेजा जा रहा है। - राजेश प्रसाद, निदेशक, इलाहाबाद संग्रहालय।

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