इन कलात्मक प्रस्तर स्तंभों में भरहुत स्तूप की दीवारों की रेलिंग के कलात्मक टुकड़े हैं। इनसे पता चलता है कि उस काल में राजा-रानी और अन्य लोग किस तरह विहार करते थे। इसके साथ प्रारंभिक बौद्ध पूजा चिह्न, चक्र, चरणपाद, जातक कथाओं के आधार पर बुद्ध के जीवन का निरूपण भी इन प्रस्तर कलाओं में दर्शाया गया है।
स्तूप की दीवार के प्रस्तर खंडों में बोधिसत्व के क्रमिक विकास को भी देखा-समझा जा सकता है। यह कृतियां उस कालखंड की पारिस्थितिकी को भी रेखांकित करती हैं। गौतम बुद्ध के जीवन-दर्शन और उस दौर के कालक्रम को समझने के लिए इन कलाकृतियों को सात समंदर पार प्रदर्शनी का हिस्सा बनाया गया।
संस्कृति मंत्रालय से हुए करार के बाद नोडल एजेंसी नेशनल म्यूजियम दिल्ली की ओर से इलाहाबाद संग्रहालय की सात बौद्ध प्रतिमाओं को न्यूयार्क के लिए भेजा गया था। अब वहां से इन मूर्तियों को तीन महीने के लिए दक्षिण कोरिया भेजा जा रहा है। - राजेश प्रसाद, निदेशक, इलाहाबाद संग्रहालय।