कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) इन दिनों प्रतियोगियों के निशाने पर है। आयोग के क्षेत्रीय कार्यालय पर तो छात्र कई दिनों से आंदोलित हैं ही, बुधवार को सिपाही भर्ती के अभ्यर्थी भी सड़क पर उतार आए। प्रतियोगियों ने मार्च निकाला और कार्यालय का घेराव भी किया। इस दौरान छात्रों ने सुभाष चौराहे पर प्रदर्शन कर चक्काजाम भी किया। पुलिस ने किसी तरह मामला संभाला।
एसएससी की ओर से 2011 में केंद्रीय सुरक्षा बलों में सिपाही के पदों पर भर्ती हुई थी। इस दौरान 28044 पद खाली रह गए थे। परीक्षा में कम अंक पाने वाले परीक्षार्थियों ने खाली पदों को भरने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर रखी है। छात्रों का आरोप है कि एसएससी कोर्ट में चल रहे मुकदमे को लटकाए रखना चाहता है। इस संबंध में मुकदमे की सुनवाई के दौरान आयोग ने अपने कई वकील भी बदलें हैं। ऐसे में मुकदमे की सुनवाई में बाधा आ रही है। आयोग की लेटलतीफी के विरोध में ही सिपाही भर्ती के लिए याचिका दाखिल करने वाले अभ्यर्थियों ने बुधवार को सुभाष चौराहे पर प्रदर्शन किया और इसके बाद एसएससी कार्यालय तक मार्च निकाला। कोर्ट में मामले को लटकाए जाने से नाराज छात्रों ने एसएससी मध्य क्षेत्र के निदेशक को ज्ञापन सौंपकर कोर्ट में अपना पक्ष रखने की मांग की है।
वहीं कर्मचारी चयन आयोग के भ्रष्टाचार के खिलाफ हाईकोर्ट के सामने धरना दे रहे अधिवक्ताओं ने भी एसएससी का घेराव किया। अधिवक्ताओं ने एसएससी के निदेशक से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। इस दौरान उन्हें आश्वस्त किया गया कि 27 मार्च को सुनवाई के दौरान एसएससी अपना पक्ष रखेगा।
आंदोलनकारियों ने सिपाही भर्ती वालों का किया समर्थन
एसएससी मध्य क्षेत्र कार्यालय पर लगातार 18 दिन से धरना प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने बुधवार को एसएससी कार्यालय पहुंचे सिपाही भर्ती के अभ्यर्थियों का समर्थन किया। इन छात्रों का कहना है कि कर्मचारी चयन आयोग की लेटलतीफी के चलते हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है।