जिला न्यायालय ने नाबालिग से दुष्कर्म और ब्लैकमेल का आरोप साबित होने पर आरोपी शैलेश कुमार गिरी को 10 साल की कैद और 45 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की धनराशि पीड़िता को दिए जाने का आदेश दिया गया है। यह निर्णय विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट पूनम ने एडीजीसी राहुल मिश्रा विशेष लोक अभियोजक इंदु प्रकाश सिंह एवं सविता पाठक को सुन कर दिया है।
प्रकरण झूंसी थाने का है। वादी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 2017 में उसका पुत्र गंभीर रूप से बीमार था और वह उसे लेकर अस्पताल में था। अभियुक्त शैलेश कुमार गिरी वहां पर बीएएमएस की ट्रेनिंग कर रहा था। परिवार से संपर्क में आ गया। फिर वह मरीज को देखने के बहाने उसके घर आया जाया करता था। वह उसकी पुत्री को बहलाने फुसलाने करने लगा और उसके कोचिंग संस्थान में पीछा करने लगा था।
उसने उसकी नाबालिग पुत्री को अपने किराए के कमरे पर ले जाकर नशीली दवा खाने-पीने की चीज में मिला दी और उसके साथ दुष्कर्म किया। साथ ही अश्लील वीडियो बनाया। अभियुक्त उसकी नाबालिग पुत्री को ब्लैकमेल करता था और साथ में भाग जाने के लिए दबाव डालता था। पीड़िता से दो लाख रुपये भी मांगे थे। परेशान होकर पीड़िता ने आत्महत्या का भी प्रयास किया किया था। अभियोजन ने आरोप साबित करने के लिए पांच गवाह पेश किए हैं।