अलादादपुर गांव में कड़ाके की ठंड में भी महिलाएं अपनी बकरी चराती फोटो आनापुर से
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क्षेत्र के अलादादपुर गांव की महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की मिसाल बनती जा रही हैं। स्वरोजगार में एक महिला दस से 15 बकरी पालन करती है जिससे अपना और बच्चों की पढ़ाई के साथ ही परिवार का खर्च आसानी से निकला है।
अलादादपुर गांव की बस्ती में परंपरागत घरेलू कार्यों तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज बकरी पालन जैसे छोटे लेकिन लाभकारी व्यवसाय से अच्छी आमदनी कर रही हैं। गांवों में बकरी पालन महिलाओं के लिए रोजगार का मजबूत साधन बनकर उभरा है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है।
गांव की अनारा देवी, शकुंतला देवी, मीना देवी बताती है कि हमें बकरी पालन के लिए ज्यादा पूंजी की आवश्यकता नहीं पड़ती। दो से तीन बकरी से आज दस से पंद्रह बकरी एक लोग के पास है और दोपहर में सब लोग साथ चराने निकलतीं हैं। इससे चारे पर होने वाला खर्च भी कम हो जाता है। महिलाएं सुबह-शाम बकरियों की देखभाल करती हैं और अन्य समय में घरेलू कार्य भी संभाल लेती हैं।
कुछ ही महीनों में बकरियों की बिक्री से महिलाओं को अच्छी आय होने लगती है। यहि नहीं डेंगू में तो 50 रुपए पाव दूध बिकता है। त्योहारों और शादी-विवाह के मौसम में बकरियों के दाम और भी बढ़ जाते हैं, जिससे मुनाफा दोगुना हो जाता है।
बकरी पालन से होने वाली आय से महिलाएं अपने बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और घर की जरूरतों को पूरा कर पा रही हैं। गांव की महिलाएं साबित कर रही हैं कि अगर सही दिशा और मेहनत हो तो छोटे व्यवसाय से भी अच्छी कमाई की जा सकती है। बकरी पालन आज महिलाओं के सशक्तीकरण का मजबूत माध्यम बनता जा रहा है।