आत्मनिर्भरता स्वतंत्रता का मूल है। बिना आत्मनिर्भर हुए स्वतंत्र नहीं हुआ जा सकता है। कहने का तात्पर्य यह है कि रामराज्य वो शासन है जिसमे सभी स्वतंत्र होते हैं। ऐसी स्वतंत्रता जिसमे धर्म और रंग भेद के आधार पर विषमता न पैदा की जाए। यही स्वतंत्रता गाँधी का रामराज्य कहलाया। गांधी का रामराज्य सत्य और अहिंसा पर आधारित था। गांधी के रामराज्य को व्यवहार में उतारना होगा। सत्य और अहिंसा को आचरण में उतारने की जरूरत है।
गांधी की विशेषताओं को रामराज्य का आधार बनाना होगा। रामराज्य लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करता है। हिंदुस्तान संस्कृति और संस्कारों की धरती रही है। यहां 2500 ईसा पूर्व ऋग्वेद की रचना हुई। योग के जनक महर्षि पतंजलि थे। योग हजारों वर्षों पुरानी पद्वति है। आज कल के जनप्रतिनिधि धर्म की आड़ में इन पुरानी संस्कृतियों का दुरूपयोग कर भारतीय संस्कृति को राजनीति का हिस्सा बना दिए हैं।
हिंदुस्तान को गांधी का रामराज्य चाहिए। राजनैतिक पार्टियां वोट को साधने के लिए रामराज्य का सहारा लेती हैं। रामराज्य भगवान राम के पुरुषार्थ और शासन का द्योतक है। भगवान राम सहिष्णुता के प्रतीक थे। राम सत्य के प्रतीक थे। तभी तो भगवान राम ने रामराज्य स्थापित किया था। आज राजनैतिक पार्टियों ने भगवान राम, कृष्ण, हनुमान, मोहम्मद पैगम्बर, ईसा मसीह आदि को वोट बैंक का आधार बना लिया है। अतएव अब राम राज्य का पतन हो चुका है। आज आत्मनिर्भर भारत बनाने की बात हो रही है और वहीँ दूसरी ओर विदेशी कंपनियां और विदेशी सामान की हिंदुस्तान में बाढ़ आ गई है।
प्रत्येक संस्था का निजीकरण होता जा रहा है। बेरोजगारी बढ़ रही है। आत्महत्याओं का ग्राफ बढ़ा है। यदि आत्मनिर्भरता, स्वतंत्रता, स्वावलंबन, स्वाभिमान की बात करनी हो तो गांधी के रामराज्य की कल्पना करनी होगी। अतएव हम कह सकते हैं कि आत्मनिर्भरता, गांधी के रामराज्य की परिकल्पना पर आधारित होनी चाहिए। सभी राजनैतिक पार्टियों को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों को आत्मसात करने की जरूरत है। वास्तव में भारत आत्मनिर्भर तभी बन पाएगा। - लेखक डॉ. शंकर सुवन सिंह, वरिष्ठ स्तंभकार एवं विचारक, असिस्टेंट प्रोफेसर, कृषि विद्यालय, नैनी, प्रयागराज (यूपी)।