प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा विभाग में कई प्रमुख पद वर्षों से खाली चल रहे हैं, इन पदों के लिए योग्य अधिकारियों का प्रमोशन कई वर्षो से नहीं किए जाने से यह समस्या खड़ी हुई है। प्रमोशन प्रक्रिया ठप होने से कई जूनियर अधिकारी वरिष्ठों का काम संभाले हुए हैं। सीनियर अधिकारियों में नाराजगी है, लेकिन सरकार के डर के चलते कोई खुलकर विरोध नहीं कर रहा है। खास बात यह है कि विभाग में पद भी हैं और अफसर भी मगर पदोन्नति नहीं हो रही है। इससे कई सीनियर अफसरों को बिना प्रमोशन के रिटायर होने का डर सता रहा है। पदोन्नति प्रक्रिया बाधित होने के चलते इन अधिकारियों की सीनियारिटी के साथ आर्थिक रूप से नुकसान हो रहा है।
प्रदेश में वर्तमान सरकार से पूर्व सपा सरकार (2012-2017) के कार्यकाल में भी माध्यमिक शिक्षा विभाग में कोई पदोन्नति नहीं की गई थी जबकि विभाग में कई अधिकारियों के पद खाली थे। 2017 में प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद से अब तक दो वर्ष में कोई पदोन्नति नहीं की गई। प्रदेश में इस दौरान माध्यमिक शिक्षा निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पद पर काम कर रहे अवध नरेश शर्मा रिटायर हो गए। उनके रिटायर होने के बाद से ही प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा का प्रभार जूनियर स्तर के अधिकारियों के पास है। वर्तमान समय में निदेशक माध्यमिक का प्रभार अपर शिक्षा निदेशक बेसिक विनय कुमार पांडेय के पास है। इसी के साथ ही प्रदेश में निदेशक साक्षरता के पद पर कार्यरत अमर नाथ वर्मा 30 मई को अवकाश ग्रहण कर रहे हैं जबकि अपर निदेशक व्यावसायिक शिक्षा के पद पर कार्य कर रहे अधिकारी 30 जून को रिटायर होंगे।
निदेशक की दौड़ में कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल
अधिकारियों को इंतजार है कि प्रदेश सरकार लोक सभा चुनाव की अधिसूचना की रोक हटते ही 23 मई के बाद माध्यमिक शिक्षा में पदोन्नति करके खाली पदों को भरेगी। निदेशक के पदों को पदोन्नति से भरा जाना है,निदेशक पद की दौड़ में प्रमुख रूप से यूपी बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव, सचिव बेसिक शिक्षा परिषद रूबी सिंह, पत्राचार संस्थान की निदेशक कीर्ति गौतम सहित कई अन्य अधिकारी प्रमुख रूप से शामिल हैं। प्रदेश में निदेशक के पदों के साथ 12 अपर निदेशक के पद खाली चल रहे हैं, यह सभी पद प्रभार वालों के भरोसे चल रहे हैं।
जेडी के तीन, डीडीआर के 45 पद खाली
प्रदेश में इसी प्रकार संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) के तीन, उप शिक्षा निदेशक (डीडीआर) के 45 पद खाली हैं। इसके पीछे विभाग में कई साल से पदोन्नति न होना बताया जा रहा है। प्रदेश में इस समय जिला विद्यालय निरीक्षक एवं उप प्राचार्य डायट के 110 पद खाली हैं, इन पदों का प्रभार जूनियर अधिकारियों के जिम्मे है। प्रमोशन का इंतजार कर रहे अधिकारियों का कहना है कि एक-दो वर्ष में बिना प्रमोशन रिटायर हो जाने पर वरिष्ठता के साथ आर्थिक नुकसान होगा।