संस्था गुफ्तगू की ओर से रविवार को जानेमाने कवि बेकल उत्साही की स्मृतियां सहेजी गईं। ‘याद-ए-बेकल’ में वरिष्ठ आलोचक प्रो.एए फातमी ने कहा, बेकल उत्साही स्कूल ऑफ पोयट्री थे। उन्होंने अपनी मेहनत और फन से गीत जैसी विधा को मंच पर स्थापित किया। उनकी शायरी में जगह-जगह खेत-खलिहान, गांव, किसान, पगडंडी जैसे वर्णन मिलते हैं। और तो और उन्होंने नातिया शायरी को भी मजबूत किया। बतौर मुख्य अतिथि सुलेमान अजीजी और वरिष्ठ कथाकार असरार गांधी ने बेकल केसंस्मरण सुनाए। साथ गुजारे दिनों को याद किया।
बतौर अध्यक्ष वरिष्ठ शायर बुद्धिसेन शर्मा ने कहा, बेकल उस दौर के शायर हैं, जब मुशायरों को बहुत इज्जत हासिल थी। उनका जाना बड़ा नुकसान है। हरवारा मस्जिद के पेश इमाम इकरामुल हक ने बेकल की नात सुनाई। अख्तर अजीज ने कहा, उनका जाना हिन्दी-उर्दू शायरी का ऐसा नुकसान है जिसे आसानी से भरा जाना मुमकिन नहीं है। डॉ.पीयूष दीक्षित ने कहा, एक छोटे से गांव से आने वाले बेकल ने शायरी की दुनिया में जितना नाम कमाया और काम किया, वह नई पीढ़ी के लिए मिसाल है।
संयोजक और संचालक इम्तियाज अहमद गाजी ने गुफ्तगू के ‘बेकल उत्साही अंक’ की रूपरेखा बताई। कहा, आज से ग्यारह बरस पहले कैलाश गौतम के निर्देशन में वह अंक निकला था तो मैं और अख्तर अजीज उनके बलरामपुर स्थित घर गए थे। नरेश कुमार महरानी ने मुनव्वर राना का लेख पढ़कर सुनाया जिसमें उन्होंने कहा था, तकरीबन तीस बरस पहले जब लोग विदेश जाने की कोशिश में लगे रहते थे, बेकल आधी दुनिया घूम चुके थे।
संयोजक और संचालक इम्तियाज अहमद गाजी ने गुफ्तगू के ‘बेकल उत्साही अंक’ की रूपरेखा बताई। कहा, आज से ग्यारह बरस पहले कैलाश गौतम के निर्देशन में वह अंक निकला था तो मैं और अख्तर अजीज बेकल जी के घर बलरामपुर गए थे। नरेश कुमार महरानी ने मुनव्वर राना का लेख पढ़कर सुनाया जिसमें उन्होंने कहा था, तकरीबन तीस बरस पहले जब लोग विदेश जाने की कोशिश में लगे रहते थे, बेकल आधी दुनिया घूम चुके थे। दूसरे चरण में हुए मुशायरे में भोलानाथ कुशवाहा, सागर होशियारपुरी, ऋतंधरा मिश्रा, फरमूद इलाहाबादी, डॉ.विनय श्रीवास्तव, अजीत शर्मा ‘आकाश’, अपराजिता, शिबली, डॉ.महेश मनमीत आदि शामिल थे। बाल भारती स्कूल में हुए कार्यक्रम के अंत में प्रभाशंकर शर्मा ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया। संचालन शैलेंद्र जय ने किया।