राम मंदिर निर्माण के लिए वातावरण बनाने की कोशिश में जुटे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नागा साधुओं के अयोध्या प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। मंदिर निर्माण के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार पर दबाव बनाने को लेकर 15 हजार नागा साधुओं को अयोध्या भेजने का अखाड़ा परिषद ने एलान किया था। विहिप और शिवसेना के बाद अखाड़ा परिषद के संत अयोध्या कूच की तैयारी में थे, लेकिन उनको अनुमति नहीं मिल सकी। दत्तात्रेय मंदिर में मंगलवार को हुई परिषद की बैठक में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि कुंभ तक सरकार ने मंदिर निर्माण शुरू नहीं कराया तो मेला खत्म होते ही साधु-संत अयोध्या पहुंच जाएंगे।
दत्तात्रेय मंदिर में अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों व साधु-संतों की मंगलवार को हुई बैठक में राम मंदिर निर्माण को लेकर गहन मंत्रणा की गई। अयोध्या से प्रयागराज पहुंचे परिषद के महामंत्री हरि गिरि व धर्मदास महाराज भी उपस्थित थे। दोनों पदाधिकारियों ने वहां के जिलाधिकारी अनिल कुमार पाठक से हुई वार्ता की जानकारी दी। सभी 13 अखाड़ों के पदाधिकारियों की मौजूदगी में बताया कि अयोध्या प्रशासन ने नागाओं के जमावड़े की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। महामंत्री ने बताया कि चार व पांच दिसंबर को दो दिन नागा साधुओं के अयोध्या में कैंप करने की अनुमति मांगी गई थी। इस दौरान सरयू तट पर पूजा के बाद साधु-संतों से मिलकर मंदिर निर्माण के लिए वातावरण बनाने का एजेंडा तय किया गया था, लेकिन प्रशासन इसके लिए तैयार नहीं हुआ। हरि गिरि ने बताया कि अयोध्या के डीएम ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए छह दिसंबर के बाद की तिथि तय करने की बात कही है। महंत धर्मदास ने बताया कि अखाड़ा परिषद में संन्यासी, बैरागी, उदासी के अलावा तमाम संत शामिल हैं। इनमें सैकड़ों की तादाद में महामंडलेश्वर, आचार्य व शंकराचार्य भी जुड़े हैं। अखाड़ों में 15 लाख नागा हैं। सभी राम जन्मभूमि जाकर दर्शन, पूजा करना चाहते हैं। इसमें मंगलवार को 15 हजार संतों का पहला जत्था आने वाला था, लेकिन वहां के जिलाधिकारी ने अनुमति देने में असमर्थता जता दी। परिषद के पदाधिकारियों ने कुंभ में ही अयोध्या में मंदिर निर्माण पर रणनीति बनाने पर सहमति जताई।
महामंडलेश्वरों को जल्द भूमि आवंटित करे मेला प्रशासन
प्रयागराज। अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि ने महामंडलेश्वरों को जल्द भूमि आवंटित करने का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि भूमि आवंटन में देरी की वजह से पायलट बाबा समेत कई संतों के ट्रकों में भर कर आए सामान पड़े हुए हैं। शिविरों के साथ यज्ञशालाओं के निर्माण में समय लगेगा। साथ ही उनका कहना था कि कुंभ के शिविरों में कनात के प्रसाधन न बनाए जाएं, ताकि आग लगने जैसी घटनाओं से बचा जा सके।