प्रयाग धर्म संसद में कवर्धा धर्म संसद के निर्णय ‘साईं न तो संत न गुरु न भगवान’ पर मुहर लगने के साथ ही मंदिरों में स्थापित साईं प्रतिमा हटाने का अभियान बसंत पंचमी को दिल्ली से शुरू होगा। ज्योतिष एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निर्देश पर हिंगलाज सेना व हिंदू डाट कॉम की ओर से मंदिरों से साईं प्रतिमा हटाने की शुरुआत दिल्ली से होगी। पहले चरण में कनाट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर, कीर्तिनगर स्थित शिव साईं मंदिर से साईं प्रतिमाएं हटाई जाएंगी।
हिंगलाज सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अग्नि अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर रामकृष्णानंद के अनुसार अखाड़े धर्मसंसद के निर्णय का पालन कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। शंकराचार्य के प्रवक्ता अजय गौतम ने बताया कि बसंत पंचमी को दिल्ली के विश्वासनगर स्थित शंकर भवन में साईं उन्मूलन यज्ञ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें साईं चित्रों की आहुति दी जाएगी। जयपुर के स्वामी प्रज्ञानानंद ने कहा साईं को अवतार बताना सनातन धर्म के साथ खिलवाड़ है।
शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा है कि साईं नहीं बल्कि उन्हें भगवान बनाने वालों का विरोध है। ऐसे लोग सनातन धर्म को ठेस पहुंचा रहे। मंगलवार को अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि साईं से उन्हें कोई सरोकार नहीं पर उनको भगवान बनाने वालों के खिलाफ मुहिम थमने वाली नहीं है। वहीं उन्होंने सद्गृहस्थ संत देवप्रभाकर शास्त्री दद्दा जी के बारे में कहा, मैं और स्वामी करपात्री ज्योतिषपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती के शिष्य हैं। इस रिश्ते से स्वामी करपात्री जी मेरे गुरु भाई हुए, देवधर शास्त्री नहीं।