लालगोपालगंज। मो. ताहिर
सावन के पवित्र महीने में जहां एक ओर बोलबम के जयकारे गूंज रहे हैं, वहीं लालगोपालगंज में एक अनूठी तस्वीर देखने को मिल रही है। यहां मुस्लिम रंगरेज अपनी पारंपरिक कारीगरी से कांवड़ियों के लिए भगवा गमछे तैयार कर रहे हैं, जो सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल है।
लालगोपालगंज के अहलादगंज, इब्राहिमपुर और खानजहानपुर मोहल्ले में इन दिनों रौनक खास है। यहां बोलबम के जयकारों संग रंगाई और छपाई का कार्य जोरों पर है। कस्बा के मुस्लिम रंगरेज परिवार पूर्वजों से धार्मिक आयोजनों से जुड़े वस्त्रों को रंगने का काम करते आ रहे हैं। यहां के बने गमछे प्रयागराज क्षेत्र सहित प्रदेश के प्रमुख बाजारों और थोक व्यापारियों तक सप्लाई की जाती है। एक अनुमान के मुताबिक सावन में पचास लाख से अधिक कारोबार होगा।
चुनरी और कलावा भी तैयार होता है
लालगोपालगंज में रंगाई और छपाई का काम सिर्फ आज का नहीं, बल्कि सदियों पुराना है। यहां के मुस्लिम रंगरेज परिवार पीढ़ियों से इस कला को संरक्षित करते आ रहे हैं। यहां न सिर्फ कांवरियों के गमछे, बल्कि देवी मंदिरों में चढ़ाई जाने वाली चुनरी और कलावा भी इन्हीं कारीगरों द्वारा तैयार किए जाते हैं।
लालगोपालगंज। मो. ताहिर
लालगोपालगंज। मो. ताहिर
लालगोपालगंज। मो. ताहिर
लालगोपालगंज। मो. ताहिर