सुनवाई के दौरान सिपाही के ससुराली जनों ने ही उसके द्वारा पति पर लगाए गए आरोपों को सही बताया था। पारिवारिक न्यायालय ने महिला सिपाही की अर्जी मंजूर करते हुए विवाह विच्छेद की डिक्री पारित कर दी। इस आदेश के खिलाफ पति हेमसिंह ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दलील दी गई कि याची द्वारा वैवाहिक संबंधों में किसी भी प्रकार की क्रूरता नही की गई है, याची अपनी पत्नी के साथ प्रेम पूर्वक जीवन व्यतीत करना चाहता है।
कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि क्रूरता साबित हो जाने के बाद तलाक बहाली का आदेश तभी दिया जा सकता है जब अदालत इस बात से संतुष्ट हो जाए कि पक्षकारों का आचरण एक दूसरे के प्रति ठीक रहेगा। लेकिन मौजूदा मामले में क्रूरता पूरी तरह साबित है। इसलिए निचली अदालत पारित आदेश पूरी तरह सही है।