मांडाखास गांव में शुक्रवार सुबह शव को सुपुर्देखाक किए जाने को लेकर हंगामा हो गया। ग्रामीणों ने मांडवी देवी धाम के समीप सड़क पर बल्ली बांधकर मार्ग अवरुद्ध कर दिया और एंबुलेंसको रोक लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस स्थान पर पक्की कब्र बनाई जा रही थी, वह वन विभाग की भूमि है। कुछ लोग उस पर अतिक्रमण कर मजार बना रहे हैं।
मूल रूप से मुगलसराय (चंदौली) के अलीनगर, पंचपेड़वा निवासी व वर्तमान में मुंबई के मलाड मालोनी में रह रहे आजाद अली की मां शाहजहां बेगम का बृहस्पतिवार को मुंबई में इलाज के दौरान निधन हो गया था। आजाद अली अपनी मां का शव मांडाखास लेकर पहुंचे।
ग्रामीणों को जैसे ही जंगल में कब्र व मजार बनाए जाने की भनक लगी तो वे मौके पर पहुंच गए और विरोध करने लगे। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया। सूचना पर इंस्पेक्टर मांडा अनिल कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करते हुए एम्बुलेंस को थाने पर खड़ा करा दिया।
हंगामे की सूचना मिलते ही एसीपी मेजा एसपी उपाध्याय, एसडीएम मेजा सुरेंद्र प्रताप यादव, तहसीलदार जमुना प्रसाद तथा वन रेंजर अजय सिंह पुलिस व वन विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारी देर शाम तक दोनों पक्षों से बातचीत कर समाधान निकालने में जुटे रहे।
वन विभाग की ओर से भूमि सीमांकन कराने के लिए 72 घंटे का समय मांगा गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वन भूमि का सीमांकन होने के बाद ही शव को सुपुर्देखाक करने की अनुमति दी जाएगी। इसके बाद परिजन शव को फ्रीजर में सुरक्षित रखने की बात कहकर अन्यत्र चले गए।
दूसरी ओर मृतका के पुत्र आजाद अली ने बताया कि उनके पिता मोहम्मद अख्तर इद्रीशी पीर थे, जिनका निधन 21 अप्रैल 2025 को हुआ था। मृत्यु से पूर्व उन्होंने मांडाखास निवासी गुड्डू से करीब डेढ़ बीघा भूमि का बैनामा कराई थी। उन्होंने इच्छा जताई थी कि मृत्यु के बाद उसी भूमि पर उन्हें सुपुर्देखाक किया जाए तथा मजार बनाई जाए। पिता की मृत्यु के बाद परिजन उनका शव मुंबई से मांडाखास लाकर सुपुर्देखाक कर चुके हैं। उस समय भी कुछ लोगों ने विरोध किया था।
एसीपी मेजा एसपी उपाध्याय ने बताया कि वन विभाग की भूमि का चिह्नीकरण ड्रोन के माध्यम से कराया जाएगा। वहीं एसडीएम मेजा सुरेंद्र प्रताप यादव ने कहा कि मांडाखास गांव का सरकारी नक्शा उपलब्ध न होने से सीमांकन में कठिनाई आ रही है। बैनामे में दर्ज भूमि संख्या का कुल रकबा लगभग 1100 बीघा है, जिसमें डेढ़ बीघा भूमि का सीमांकन करना चुनौतीपूर्ण है। इसी कारण ड्रोन सर्वे कराने का निर्णय लिया गया है।