गुलाब की खेती के लिए खेत तैयर करते जिज्ञासु।
- फोटो : अमर उजाला।
जिज्ञासु बताते हैं कि वे हर साल इसमें लगभग 30 ट्राली जैविक खाद डालते हैं। गोबर व गोमूत्र का इस्तेमाल गुलाब की टाप सीक्रेट व डिवाइन प्रजाति की खेती हो रहा है। टाप सीक्रेट गुलाब का प्रयोग बुके में होता है। दस से 12 रंग के गुलाब होते हैं लेकिन बाजार में लाल गुलाब की मांग अधिक है।
वे बताते हैं कि परंपरागत खेती से इतर हमने गुलाब की व्यावसायिक खेती को चुना। जिसमें शुरुआत में पैसे तो लगे लेकिन अब उसका फायदा मिल रहा है। अभी तीन एकड़ में गुलाब की खेती हो रही है, लेकिन कुछ दिनों बाद दो एकड़ क्षेत्रफल और बढ़ाने पर काम चल रहा है। बिचौलियों का दखल खत्म कर अक्तूबर से खुद निर्यात करने की योजना चल रही है।
गुलाब के फूल का हो रहा उत्पादन।
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पॉली हाउस से नियंत्रित किया जाता है तापमान
यह होता है पॉलीहाउस स्टील की चादर से शामियाने की तरह बना होता है, जिसके ऊपर प्लास्टिक का चादर चढ़ाया जाता है। पॉलीहाउस तापमान को नियंत्रित करने, उचित मात्रा में खाद को पौधों तक पहुंचाने, सिंचाई के लिए कम पानी की खपत आदि को ध्यान में रखकर बनाया जाता है। इस तकनीक का आविष्कार इस्राइल में हुआ। इस्राइल में रेतीली-पथरीली जमीन होने से वहां के किसान पॉलीहाउस का उपयोग बड़ी संख्या में करते हैं। इसका चलन भारत में भी बढ़ रहा है।
पॉलीहाउस बनाने के लिए सरकार किसानों को 35 फीसदी तक सब्सिडी देती है। इसके लिए यूपी हार्टीकल्चर विभाग की वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण कराना होता है। इसके लिए किसानों को सरकार की ओर से कर्ज भी दिया जाता है। पॉलीहाउस आधुनिक तरीके से खेती करने के लिए होता है। - सुरेंद्र कुमार भास्कर, जिला उद्यान अधिकारी।