शहर के खुल्दाबाद, लूकरगंज और हिम्मतगंज में बदहाल, गड्ढों वाली सड़कों को बनवाने से एडीए ने पल्ला झाड़ लिया है। इससे यहां सीवरेज कार्य कराने वाले गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अफसर सड़क रेस्टोरेशन न कराने के जाल में खुद फंस गए हैं। सीवरेज कार्य के लिए खोदी गई पांच फीट सड़क न बनाने की लापरवाही अब भारी पड़ रही है। पूरी उखड़ी सड़कें अब उन्हें पूर्व की स्थिति में लानी हैं। अमर उजाला ने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया तो इकाई ने फिलहाल सड़क पर गड्ढों का पाटने का काम लूकरगंज से शुरू कराया है।
छह महीने पहले इन इलाकों में गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने सीवरेज कार्य कराया। फिर सीवर कनेक्शन देने के लिए डेढ़ से दो फीट सड़कें खोदीं। तमाम शिकायतों को नजरंदाज कर विभाग ने सड़कों की पूर्व स्थिति बहाल नहीं कराई। जहां ज्यादा हल्ला मचा वहां गिट्टी या मलबा डालकर गड्ढे पाट दिए गए। बारिश के दौरान एडीए ने नाली निर्माण का काम कराया। साथ ही सड़क चौड़ीकरण के लिए पटरी खोदकर गिट्टी डाल दी।
लगातार हो रही बारिश के दौरान सीवरेज कार्य से उखड़ी सड़कें खतरनाक हो गईं। इस महीने के दूसरे सप्ताह से लागू ट्रैफिक डायवर्जन से खुल्दाबाद से चौफटका और बनर्जी तिराहा लूकरगंज से अग्रसेन कॉलेज के रास्ते खुसरोबाग तक सड़कें चलने लायक नहीं है। भारी वाहनों के दबाव से बिगड़ी सड़कों पर कहीं मिट्टी के टीले तो कहीं बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। इन गड्ढों में भरा पानी किसी को घायल करने के लिए काफी है।
शासन से कमिश्नर, डीएम तक हुई शिकायत के बाद एडीए ने साफ कर दिया कि गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई सड़कें दुरुस्त करके दे तो वे तारकोल काम कराएंगे। अमर उजाला ने लोगों की हर दिन बढ़ती परेशानी को उठाया तो कमिश्नर और डीएम ने जल निगम के मुख्य अभियंता और इकाई के जीएम को सड़कों को पूर्व की स्थिति में लाने का निर्देश दिया। जल निगम के मुख्य अभियंता जीसी दुबे ने अधिशासी अभियंता के नेतृत्व में टीम गठित कर क्षेत्र का मुआयना कराया। लूकरगंज में गिट्टी डालकर गड्ढे भी पाटे। अब न चाहते हुए भी गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई को पूरी सड़क बनवानी होगी। प्रभावित इलाकों में उखड़ी सड़कों पर यह पता करना कठिन है कि कहां सीवर लाइन बिछाई और कहां कनेक्शन दिया।
कुंभ के कार्यों में लगे विभागों के अफसर एक दूसरे सिर लापरवाही का ठीकरा फोड़ते हैं। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने सीवरेज कार्य के बाद सड़कों की पूर्व स्थिति बहाल नहीं कराई, गलत किया। वहीं एडीए ने भी नाली निर्माण और सड़क चौड़ीकरण के दौरान खोदाई से निकला मलबा-मिट्टी नहीं हटाकर भी गलती की। तकनीकी जानकारों के मुताबिक मलबा न हटाने से बारिश के पानी का बहाव ठहर गया। इससे हल्की फुल्की खराब सड़कें पूरी तरह उखड़ गईं। लूकरगंज में मध्यान चौराहे से पुलिस बूथ तक और खुसरोबाग के बगल खुल्दाबाद छोर पर मछली बाजार तिराहे पर जमा मलबा सड़कों के उखड़ने का बड़ा कारण बना है। गलती या लापरवाही एडीए की हो या गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई की हो, लेकिन यह सच है कि इन खामियों का खामियाजा हर दिन हजारों शहरी भुगत रहे हैं।