RO ARO Mains: 20 candidates withdrew their names
प्रयागराज। समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ)-2016 की मुख्य परीक्षा में शामिल हुए 20 अभ्यर्थियों ने परीक्षा से अपना अभ्यर्थन वापस लेने के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) को प्रार्थना पत्र दिए हैं। इन अभ्यर्थियों के नाम वापस लेने से आरओ/एआरओ भर्ती परीक्षा में स्पर्धा कुछ कम होगी और अब मुख्य परीक्षा में शामिल हुए अन्य अभ्यर्थियों के लिए चयन के अवसर भी बढ़ेंगे।
आयोग ने आरओ/एआरओ-2016 की मुख्य परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थियों से आवेदन मांग थे कि अगर उनका चयन किसी अन्य पद पर हो चुका है और वे इस परीक्षा में अपना अभ्यर्थन नहीं रखना चाहते हैं तो अभ्यर्थन वापस लेने के लिए 19 से 26 फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं। इस बीच आयोग को कुल 20 अभ्यर्थियों के आवेदन मिले। आयोग ने इस साल 30 जनवरी को खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) और 17 फरवरी को पीसीएस-2019 का अंतिम चयन परिणाम जारी किया गया था। इसमें तमाम ऐसे अभ्यर्थियों का भी अंतिम रूप से चयन हुआ था, जो आरओ//एआरओ-2016 की मुख्य परीक्षा में शामिल हुए थे।
पीसीएस में चयन के बाद अगर आरओ/एआरओ की मुख्य परीक्षा में भी उनका चयन हो जाता तो ऐसे अभ्यर्थी पीसीएस या बीईओ के पद को ही तरजीह देते थे और आरओ/एआरओ के पद खाली रह जाते। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने अभ्यर्थन वापसी के लिए आवेदन मांगे थे। आरओ/एआरओ 361 पदों पर भर्ती के लिए प्रारंभिक परीक्षा 20 सितंबर 2020 को आयोजित की गई थी। तीन लाख 85 हजार 122 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे और 140301 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। 5754 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया था।
मुख्य परीक्षा पिछले साल 22 एवं 23 दिसंबर को आयोजित की गई थी। अभ्यर्थन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग जल्द ही इस परीक्षा का परिणाम जारी सकता है। आयोग के मीडिया प्रभारी पुष्कर श्रीवास्तव ने बताया कि अभ्यर्थन वापसी के लिए 20 अभ्यर्थियों के आवेदन मिले हैं।
विवाद के कारण पांच साल से फंसी है भर्ती
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग आरओ/एआरओ-2017 का अंतिम चयन परिणाम काफी पहले जारी कर चुका है, लेकिन आरओ/एआरओ-2016 की भर्ती विवाद के कारण फंसी रही। आरओ/एआरओ-2016 की पहली प्रारंभिक परीक्षा में पेपर व्हाट्सएप पर वायरल होने के आरोप लगे थे। इसकी सीबीआई जांच भी हुई। लंबे तक विवाद का निपटारा नहीं हो सका तो आयोग ने प्रारंभिक परीक्षा निरस्त कर दी और प्रारंभिक परीक्षा दोबारा आयोजित कराई गई। पांच साल बाद अब भर्ती पूरी होती नजर आ रही है।