मुजफ्फनगर दंगे में आरोपी विधायकों और सांसदों को आगामी विधान सभा चुनाव में नामांकन करने से रोकने की मांग हाईकोर्ट ने नामंजूर कर दी है। कोर्ट ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई कानून नहीं है, जिससे आरोपियों को नामांकन और चुनाव लड़ने से रोका जा सके। मात्र आरोपपत्र दाखिल होने के आधार पर किसी को रोका नहीं जा सकता है।
अधिवक्ता एसके खोखर की जनहित याचिका में बिजनौर के भाजपा सांसद कुंवर भारतेंदु सिंह, सरधना मेरठ के विधायक संगीत सिंह सोम, शामली के विधायक सुरेश राणा, पूर्व सांसद कादिर राणा, बर्थवाल मुजफ्फनगर के विधायक नूर सलीम राणा, मौलाना जमील और कांग्रेस नेता सईदुज्जमा को पक्षकार बनाया गया था। कहा गया कि इन सभी के खिलाफ मुजफ्फनगर के दंगे में शामिल होने का आरोप है। दंगे की जांच कर रही एसआईटी ने इनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए हैं। इसलिए इनको चुनाव लड़ने से रोका जाए। कोर्ट ने याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि ऐसा कोई कानून नहीं है कि किसी को मात्र चार्जशीट दाखिल होने के आधार पर चुनाव लड़ने से रोका जाए।