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High Court : सुबूत इकट्ठा कर पेश करने का अधिकार निष्पक्ष न्याय की आत्मा,  जमानत का मजबूत आधार

Fri, 17 Oct 2025 06:35 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी की ओर से बचाव में सुबूत इकट्ठा कर पेश करने का अधिकार महज औपचारिकता नहीं, निष्पक्ष न्याय की आत्मा है। लिहाजा, यह तर्क जमानत का मजबूत आधार है।
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अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी की ओर से बचाव में सुबूत इकट्ठा कर पेश करने का अधिकार महज औपचारिकता नहीं, निष्पक्ष न्याय की आत्मा है। लिहाजा, यह तर्क जमानत का मजबूत आधार है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अजय भनोट की अदालत ने आशा, विकास कंजड़ सहित दर्जनों आरोपियों की जमानत अर्जियों को स्वीकार कर लिया।

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याचियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि निष्पक्ष सुनवाई और ज़मानत पाना आरोपी का मौलिक अधिकार है। यदि आरोपी को जमानत से वंचित किया गया तो वह प्रभावी ढंग से अपना बचाव नहीं कर सकेगा। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अशोक मेहता और अपर शासकीय अधिवक्ता प्रथम परितोष कुमार मालवीय ने दलील दी कि बचाव के लिए जमानत मांगना कोई वैधानिक आधार नहीं है।

कोर्ट ने जमानत अर्जियों को स्वीकार करते हुए कहा कि अभियोजन की ओर से साक्ष्य पेश करने के बाद आरोपी को भी बचाव का अवसर दिया जाता है। यह आरोपी के लिए बेगुनाही साबित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उसकी सार्थकता तभी सिद्ध हो सकती है जब आरोपी को अपने पक्ष में सबूत इकट्ठा करने का अवसर मिले। लिहाजा, अभियोजन का साक्ष्य पूरा होने के बाद भी आरोपी को जमानत पर रिहा न करना न्यायिक दृष्टि से गलत है। हालांकि, अपराध की प्रकृति, उसकी गंभीरता और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए, आरोपी को जमानत देते वक्त अतिरिक्त शर्तें लगाई जा सकती हैं।

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