फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रयागराज :  राजनीतिक सफर के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे रेवती रमण सिंह, भविष्य को लेकर लग रहीं अटकलें 

Sun, 13 Mar 2022 07:08 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

प्रदेश सरकार में वह तीन बार मंत्री भी रहे। इसके अलावा इलाहाबाद (अब प्रयागराज) से वह दो बार सांसद भी चुने गए। एक बार वह भाजपा के दिग्गज नेता केंद्रीय मंत्री रह चुके डॉ. मुरली मनोहर जोशी को हराकर सांसद चुने गए थे और अब राज्यसभा सदस्य हैं।
विज्ञापन
राज्यसभा सदस्य रेवती रमण सिंह - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

करीब छह दशक से यमुनापार की सियासत की धुरी रहे सपा के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सदस्य रेवती रमण सिंह का राजनीतिक सफर जीवन के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है। दो बार विधायक रहे बेेटे उज्जवल रमण सिंह को इस बार करारी पराजय मिली, तो रेवती रमण का कार्यकाल भी जुलाई में खत्म हो जाएगा। ऐसे में उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें लगने लगीं हैं।
विज्ञापन



1963 से सक्रिय राजनीति में आए रेवती रमण सिंह करछना से आठ बार विधायक रह चुके हैं। प्रदेश सरकार में वह तीन बार मंत्री भी रहे। इसके अलावा इलाहाबाद (अब प्रयागराज) से वह दो बार सांसद भी चुने गए। एक बार वह भाजपा के दिग्गज नेता केंद्रीय मंत्री रह चुके डॉ. मुरली मनोहर जोशी को हराकर सांसद चुने गए थे और अब राज्यसभा सदस्य हैं।

उज्ज्वल रमण सिंह - फोटो : SELF
अपने गढ़ वाले बूथों पर भी मिली पराजय
रेवती रमण के सांसद चुने जाने के बाद करछना सीट से उनके बेटे उज्जवल रमण सिंह ने सियासी विरासत को आगे बढ़ाया और दो बार विधायक चुने गए, लेकिन 2022 के चुनाव में हार के बाद कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि  उन्हें अपने गढ़ वाले बूथों पर ही हार का सामना करना पड़ा।



भाजपा सरकार में भी करछना विधानसभा क्षेत्र के चाका, करछना एवं कौंधियारा ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में सपा समर्थित प्रत्याशी को जीत मिली। इसे रेवती रमण सिंह के प्रभाव के रूप में देखा गया, लेकिन विधानसभा चुनाव में इन तीनों प्रमुखोें के गांव में ही उज्जवल रमण सिंह भाजपा प्रत्याशी से पीछे रह गए। इसके अलावा जिन गांवों के बूथों पर रेवती रमण तथा उज्जवल रमण एक हजार से अधिक मतों से लीड लेने में सफल रहते थे, उनमें से कई पर यह अंतर सिमटकर 100 के भीतर रह गया।



हालांकि, उनके समर्थकों के बड़े तबके का मानना है कि  पार्टी एवं क्षेत्र में रेवती रमण की मजबूत पकड़ है। ऐसे में 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा उज्जवल रमण को प्रयागराज से प्रत्याशी बना सकती है। इसके अलावा अन्य विकल्पों की चर्चा शुरू हो गई है।
विज्ञापन

सपा विधायक उज्ज्वल रमण सिंह - फोटो : अमर उजाला
यादव संग अन्य पिछड़ों ने दिया साथ तो जीत गई सपा

विधानसभा चुनाव के नतीजे सपा के लिए पूर्व की तुलना में बेहतर रहे, लेकिन बड़ी जीत की उम्मीदों को झटका लगा है। इसके पीछे यादव छोड़ अन्य पिछड़ाें का साथ नहीं मिलने को कारण माना जा रहा है। अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों का उन्हीं सीटों पर समर्थन मिला, जहां पार्टी ने उनके बीच के नेता को प्रत्याशी बनाया।



सपा नेताओं ने विधानसभा चुनाव में हार-जीत की समीक्षा शुरू कर दी है। पार्टी ने इस चुनाव में जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर टिकटों का वितरण किया। अपना दल कमेरावादी समेत करीब एक दर्जन पार्टियों से गठबंधन भी किया, लेकिन इसका बड़ा फायदा नहीं मिला। यादव एवं मुस्लिम मतदाता तो पार्टी के साथ मजबूती से खड़े रहे, लेकिन अन्य पिछड़ी जाति के मतदाताओं का साथ सिर्फ मेजा एवं हंडिया में ही मिला।



मेजा में सपा प्रत्याशी संदीप पटेल के पक्ष में यादव एवं मुस्लिमों के अलावा सजातीय मतदाताओं का भी ध्रुवीकरण हुआ और वह जीत हासिल करने में सफल रहे। यही स्थिति हंडिया में भी रही और हाकिम लाल बिंद यादव एवं मुस्लिमों के साथ सजातीय मतदाताओं को अपने पाले में लाने में सफल रहे।



गौर करने वाली बात यह भी है कि 2012 में पार्टी ने प्रयागराज की आठ सीटों पर जीत हासिल की थी। इनमें फूलपुर से सईद अहमद, फाफामऊ से अंसार अहमद तथा शहर पश्चिमी से परवेज अहमद विजयी हुए थे, लेकिन इस बार एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को जीत नहीं मिली।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें