इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में शिक्षक भर्ती पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से रोक लगा दिए जाने से शोधार्थी भड़के हुए हैं। इन शोधार्थियों ने इविवि में शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन भी किया है। शुक्रवार को शोधार्थियों ने विजयनगरम हॉल में प्रदर्शन किया और भर्ती शीघ्र शुरू किए जाने की मांग की।
छात्रों ने कहा कि लंबे समय बाद इविवि की ओर से विज्ञापन जारी कर असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के 558 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए लेकिन अब मंत्रालय ने इस पर रोक लगाकर बेरोजगारों को झटका दे दिया। भर्ती न होने और शिक्षकों की संख्या लगतार घटने के कारण इविवि की रैंकिंग गिरती जा रही है। विश्वविद्यालय में शिक्षकों के आधे से अधिक पद रिक्त हैं। अतिथि प्रवक्ता के भरोसे विश्वविद्यालय कब तक चलेगा। डॉ. बृजेशा शाुक्ला एवं डॉ. अजीत कुशवाहा ने नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान तय किया गया है कि शोधार्थियों की ओर से मंत्री से मिलने के लिए समय मांगा जाएगा। साथ ही पीएमओ और एमएचआरडी को फैक्स के माध्यम से ज्ञापन भेजकर स्थिति से अवगत कराया जाएगा। प्रदर्शन में डॉ. विजय शंकर पांडेय, डॉ. अभिषेक राजपूत, विपिन मिश्र, कमल प्रताप सिंह, डॉ. राजेश द्विवेदी, सिकंदर पासवान आदि शामिल रहे।
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ने रोक को जायज ठहराया
एबीवीपी के केंद्रीय विश्वविद्यालयों के सह संयोजक एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष रोहित मिश्र ने शिक्षक भर्ती पर रोक को जायज ठहराते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय के आदेश को न्यायोचित बताया है। पूर्व अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि वर्तमान कुलपति के कार्यकाल में विश्वविद्यालय अनियमितता, अराजकता एवं भ्रष्टाचार का पर्याय बन गया है। विगत तीन वर्षों से अध्यापकों एवं अधिकारियों के पदों पर नियुक्त में भ्रष्टाचार, अनियमितता, भाई भतीजा वाद चल रहा है। छात्रावासों के मूल स्वरूप को नष्ट कर दिया गया है। पूर्व अध्यक्ष ने मांग की है कि कुलपति के वित्तीय अधिकारों पर भी तत्काल रोक लगाई जाए।