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Research : कैंसर और दिल की बीमारी से बचाती है काली गाजर, वैज्ञानिकों ने शोध में किया दावा

Sat, 06 Jan 2024 02:44 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इस आशय का शोध पत्र राजा रमन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, इंदौर में फरवरी माह में आयोजित होने जा रहे नेशनल लेजर सिम्पोजियम के 32 में वार्षिक सम्मेलन में प्रस्तुति के लिए चुना गया है।
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काली गाजर के फायदे - फोटो : iStock
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विस्तार
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अगर आप काली गाजर का नियमित रूप से सेवन करते हैं तो कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे बहुत कम होंगे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के भौतिक विज्ञान विभाग के शोध में यह दावा किया गया है। स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक से किए गए शोध के दौरान काली गाजर में एंथोसाइनिन रसायन पाया गया है, जो इन गंभीर बीमारियों से बचाता है।

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इस आशय का शोध पत्र राजा रमन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, इंदौर में फरवरी माह में आयोजित होने जा रहे नेशनल लेजर सिम्पोजियम के 32 में वार्षिक सम्मेलन में प्रस्तुति के लिए चुना गया है। साथ ही यह शोध टेलर एंड फ्रांसिस समूह के अंतरराष्ट्रीय जनरल एनालिटिकल लेटर्स में प्रकाशन के लिए भेज दिया गया। शोध के प्रकाशन के बाद इसके पेटेंट की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

इस शोध के दौरान भौतिक विज्ञान विभाग के प्रो. केएन उत्तम और उनके शोधार्थी ऐश्वर्य अवस्थी, आराधना त्रिपाठी, छवी बरन, सृष्टि शर्मा, अपर्णा तिवारी, श्रुति शुक्ला और श्रेयसी पांडेय ने मिलकर प्रयोगशाला लेजर इंड्यूस्ड स्पेक्ट्रोस्कोपी आधारित तकनीक विकसित की। इसके जरिये काली गाजर के विभिन्न भागों में उपस्थित जैविक यौगिकों का पता लगाया।
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इनमें कैरोटिनाइड, ग्लूकोज, फ्रुक्टोज, क्लोरोफिल, एंथोसाइनिन एवं सेलुलोज जैसे जैविक योगिक शामिल हैं। प्रो. उत्तम बताते हैं कि काली गाजर में इन यौगिकों की प्रचुर मात्रा में उपस्थिति के कारण मधुमेह, तंत्रिका संबंधी विकार, हृदय रोग, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा टल जाता है। एंथोसाइनिन रसायन वजन घटाने और आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी कारगर है।

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ऐसे हुआ शोध

वैज्ञानिक दल ने प्रयागराज की कटरा मंडी से काली गाजर खरीदी। गैर संक्रमित, गैर धबबेदार, स्वस्थ, सामान रंग वाली परिपक्व काली गाजरों को पानी से धोकर साफ किया गया। फिर कमरे के तापमान पर सुखाया गया। ऐसा करने से काली गाजर की सतह पर उपस्थित अशुद्धियां समाप्त हो जाती हैं। फिर गाजर के फलों को पेप्लान लेपित स्टील के चाकू से विभिन्न भागों में काटा गया। इसके बाद काली गाजर के कटे हुए विभिन्न भागों का रमन स्पेक्ट्रोस्कॉपी और लेजर इंड्यूस्ड स्पेक्ट्रोस्कोपी की मदद से वर्णक्रम यानी स्पेक्ट्रम प्राप्त किया गया। प्राप्त स्पेक्ट्रम के विश्लेषण से काली गाजर की विभिन्न परतों में अलग-अलग मात्रा में जैविक योगिकों की समृद्ध उपस्थिति का पता चला।

काली गाजर में 40 फीसदी अधिक एंथोसाइनिन

प्रो. केएन उत्तम के अनुसार पीली या लाल गाजर के मुकाबले काली गाजर में एंथोसाइनिन की मात्रा 40 फीसदी अधिक होती है। ये तथ्य भी शोध के दौरान सामने आए। यही वजह है कि पीली और लाल गाजर के मुकाबले काली गाजर गंभीर बीमारियों से बचाने में ज्यादा कारगर है।
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