जावेद पंप पर आरोप है कि उन्होंने और लोगों के साथ मिलकर पत्थरबाजी कराई, जिससे भवन के कैमरे, स्विच, केबल आदि क्षति की हुई। मेसर्स लार्सन और टर्बों लिमिटेड की ओर से अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। याची के अधिवक्ता एसएफए नकवी ने तर्क दिया कि याची का प्राथमिकी में नाम नहीं था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में प्रयागराज के खुल्दाबाद थाने में 2022 में दर्ज प्राथमिकी पर जावेद मोहम्मद उर्फ जावेद पंप को राहत दी है। कोर्ट ने जावेद पंप की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए उसे रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि याची को निजी मुचकले और दो प्रतिभूतियों पर रिहा किया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति ज्योत्सना शर्मा ने जावेद पंप की जमानत अर्जी पर दिया है।
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जावेद पंप पर आरोप है कि उन्होंने और लोगों के साथ मिलकर पत्थरबाजी कराई, जिससे भवन के कैमरे, स्विच, केबल आदि क्षति की हुई। मेसर्स लार्सन और टुब्रो लिमिटेड (एल एंड टी) की ओर से अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। याची के अधिवक्ता एसएफए नकवी ने तर्क दिया कि याची का प्राथमिकी में नाम नहीं था।
उसे फंसाने के लिए जानबूझकर एक महीने के बाद नाम सामने लाया गया है। वह इस मामले में दो महीने से अधिक समय से जेल में है। हालांकि सरकारी अधिवक्ता ने जमानत अर्जी का विरोध किया। कहा कि याची सार्वजनिक संपत्ति नुकसान पहुंचाने का आदि है। कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए याची की जमानत मंजूर करते हुए रिहा करने का आदेश पारित किया।