याची की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दयाशंकर मिश्रा ने दलील दी कि राज्य सरकार के पास अपने पूर्व के आदेश की समीक्षा करने का अधिकार नहीं है, इसलिए हिरासत की अवधि दुबारा बढ़ाने का आदेश गैरकानूनी है। इस आदेश के आधार पर आरोपी को हिरासत में रखना भी अवैध है।
कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करते हुए हुए दुबारा हिरासत अवधि बढ़ाने का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि आरोपी किसी अन्य मामले में वांछित न हो तो उसे तत्काल रिहा किया जाए।