हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के प्रयास से नए चैंबर के आवंटन में अधिवक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। अध्यक्ष राकेश पांडे, महासचिव अखिलेश कुमार शर्मा के नेतृत्व में चैंबर अलॉटमेंट कमेटी की बैठक में मासिक किराये और सुरक्षा राशि को घटाने का निर्णय लिया गया है।
नामित वरिष्ठ अधिवक्ता के लिए सुरक्षा राशि 2.50 लाख से घटाकर 1.25 लाख रुपये और गैर नामित वरिष्ठ अधिवक्ता के लिए सुरक्षा राशि एक लाख से घटाकर 75 हजार रुपये कर दिया गया है। एसोसिएशन की नई सूची के अनुसार गैर नामित वरिष्ठ अधिवक्ता, नामित वरिष्ठ अधिवक्ता श्रेणियों के तहत आने वाले मुख्य किरायेदारों और सह-किरायेदारों के किराये में सीधी कटौती की गई है।
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नामित श्रेणी में जो किराया पूर्व में 5,000 रुपये निर्धारित था, उसे घटाकर 1,500 रुपये कर दिया गया है। इसी प्रकार गैर नामित वरिष्ठ अधिवक्ता श्रेणी के तहत आने वाले मुख्य और सह-किरायेदारों के लिए भी किराया 2,500 रुपये से कम करके 1,500 रुपये कर दिया गया है। परामर्श सीट का किराया 500 रुपये पर यथावत रखा गया है।
किराये के साथ-साथ सुरक्षा राशि में भी कटौती की गई है। नामित श्रेणी के मुख्य और सह-किरायेदारों के लिए सिक्योरिटी राशि को 2.50 लाख रुपये से घटाकर आधा यानी 1.25 लाख रुपये कर दिया गया है। गैर नामित श्रेणी के मुख्य किरायेदारों के लिए सिक्योरिटी राशि एक लाख रुपये से घटकर 75 हजार रुपये और सह-किरायेदारों के लिए 50 हजार से घटकर 30 हजार रुपये कर दी गई है।
परामर्श सीट के लिए सुरक्षा राशि में कोई परिवर्तन नहीं किया गया। यह 10 हजार रुपये की पूर्व निर्धारित राशि पर ही बनी रहेगी। संयुक्त सचिव (प्रेस) रामेश्वर दत्त पांडे ने बताया कि अधिवक्ताओं की वित्तीय स्थिति और उनकी कार्यक्षमता को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया गया है। इस दौरान वरिष्ठ उपाध्यक्ष कमलेश कुमार द्विवेदी सहित अन्य रहे।
नवनिर्मित चैंबरों के आवंटन के लिए जारी शुल्क के विरोध में महानिबंधक मंजीत सिंह श्योरण को ज्ञापन सौंपा गया। कहा गया कि जारी दरें अभी युवा व सामान्य अधिवक्ताओं की आर्थिक क्षमता के अनुरूप नहीं है। मासिक किराया निशुल्क किया जाए। अधिवक्ता मनीष द्विवेदी ने कहा कि जब तक आवंटन उचित दरों पर नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।