प्रयाग जंक्शन से रेलवे ने अयोध्या के लिए तीन स्पेशल ट्रेनें चलाईं। इसके अलावा प्रयागराज जंक्शन से पंडित दीनदयाल उपाध्याय की ओर दो मेला स्पेशल एवं कटनी की ओर एक ट्रेन चलाई गई। प्रयागराज रामबाग से सर्वाधिक पांच मेला स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं। यहां से पूर्व निर्धारित बनारस, भटनी, गोरखपुर के लिए चार ट्रेनें चलाई गईं। बाद में बनारस के लिए एक और ट्रेन चलाई गई। रामबाग और प्रयाग में सभी नॉन स्टॉप ट्रेनों को ठहराव भी दिया गया।
यात्री आश्रय स्थल से मिला जंक्शन पर प्रवेश, सिविल लाइंस से रही नो इंट्रीप्रयागराज जंक्शन पर भीड़ नियंत्रित करने के लिए जंक्शन के सिटी साइड पर बने यात्री आश्रय स्थल से ही श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया गया। इस बार आरक्षित टिकट वाले यात्री भी आश्रय स्थल पर रोके गए। उन्हें बारी-बारी से वहां से निकाले जाने की प्रक्रिया हुई। जंक्शन से चली तीनों ही स्पेशल में तकरीबन 2500-2500 यात्री अपने गंतव्य के लिए रवाना हुए। यहां सिविल लाइंस साइड से यात्रियों के प्रवेश पर पाबंदी रही। इसी तरह प्रयागराज संगम स्टेशन रूटीन ट्रेनों के यात्रियों के लिए खोला गया, लेकिन मेला स्पेशल के यात्रियों को प्रयाग जाकर ही ट्रेन मिल सकी।
झूंसी जाकर पकड़नी पड़ी वाराणसी, गोरखपुर रूट की बसें
मौनी अमावस्या की वजह से शास्त्री पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही बंद होने की वजह से वाराणसी और गोरखपुर रूट की ओर जाने वाले यात्रियों को झूंसी से बसें पकड़नी पड़ीं। उधर, लीडर रोड और जीरो रोड बस स्टेशन से बसों की आवाजाही न होने से यात्रियों को दिक्कत हुई। मिर्जापुर, बांदा रूट की बसें नैनी स्थित लेप्रोसी मिशन चौराहे से ही यात्रियों को मिल सकीं। कर्वी से आई महिला सुमन और अंजू ने बताया कि रात में वह जीरो रोड बस स्टेशन पर ही बस से उतरी थी।
गंगा स्नान के बाद जीरो रोड वापस आईं तो मालूम पड़ा कि बस कहीं और से मिलेगी। इसी तरह संगम स्नान कर सिविल लाइंस पहुंचे मनोज कुशवाहा, राम सजीवन पटेल भी खासे मायूस हो गए। उन दोनों को बस स्टेशन में बताया गया कि देवरिया की बस झूंसी से ही मिलेगी। रोडवेज सिविल लाइंस डिपो के एआरएम सीबी राम ने बताया कि शाम सात बजे तक ही तकरीबन दो हजार बसों का संचालन हो चुका था। देर रात तक यह आंकड़ा ढाई हजार को पार कर जाएगा।