याचियों की ओर से कहा गया कि धर्मांतरण विरोधी अधिनियम के प्रावधानों का कोई उल्लंघन नहीं किया गया है। क्योंकि, अधिनियम की धारा आठ और नौ में निहित कानून के प्रावधान का पालन नहीं किया गया। जबकि, इनका पालन किया जाना अनिवार्य है। कहा गया कि वास्तव में कोई धर्म परिवर्तन नहीं किया गया है। यह याचिका अधिनियम की धारा तीन, पांच और 12 को चुनौती देती है। लिहाजा, याचियों को अंतरिम राहत दी जा सकती है। हालांकि, सरकारी अधिवक्ता की ओर से इसका विरोध किया गया। कोर्ट ने याचियों को कोई राहत नहीं दी, लेकिन यूपी सरकार से जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।