फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट : धर्मांतरण मामले में शुआट्स वीसी सहित सात आरोपियों को राहत देने से इन्कार, गिरफ्तारी पर नहीं लगी रोक

Sat, 17 Jun 2023 12:52 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कोर्ट ने कहा कि प्राथमिकी के आधार पर याचियों के खिलाफ शिकायतकर्ता द्वारा सीधे लालच देकर धर्म परिवर्तन करने का आरोप लगाया गया है। इनके खिलाफ प्रथम दृष्टया यूपी धर्मांतरण विरोधी कानून की धारा तीन के तहत आरोप बनता है।
विज्ञापन
आरबी लाल, कुलपति शुआटस। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी धर्मांतरण विरोधी कानून की धारा तीन और पांच को असंवैधानिक करार देने वाली याचिका पर विचार करते हुए शुआट्स वीसी आरबी लाल सहित सात अन्य को राहत देने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया इन धाराओं में कोई असंवैधानिकता नहीं नजर आती है। लिहाजा, इन्हें गैर संवैधानिक नहीं कहा जा सकता है। यह आदेश न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति गजेंद्र कुमार की खंडपीठ ने डाॅ. आरबी लाल व सात अन्य की ओर से दाखिल याचिका को खारिज करते हुए दिया है।

विज्ञापन


कोर्ट ने कहा कि प्राथमिकी के आधार पर याचियों के खिलाफ शिकायतकर्ता द्वारा सीधे लालच देकर धर्म परिवर्तन करने का आरोप लगाया गया है। इनके खिलाफ प्रथम दृष्टया यूपी धर्मांतरण विरोधी कानून की धारा तीन के तहत आरोप बनता है। मामले में याचियों के खिलाफ फतेहपुर जिले के कोतवाली थाने में फरवरी 2023 में प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। याचियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर यूपी धर्मांतरण विरोधी कानून की धारा तीन, पांच और 12 को चुनौती देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

विज्ञापन

याचियों की ओर से कहा गया कि धर्मांतरण विरोधी अधिनियम के प्रावधानों का कोई उल्लंघन नहीं किया गया है। क्योंकि, अधिनियम की धारा आठ और नौ में निहित कानून के प्रावधान का पालन नहीं किया गया। जबकि, इनका पालन किया जाना अनिवार्य है। कहा गया कि वास्तव में कोई धर्म परिवर्तन नहीं किया गया है। यह याचिका अधिनियम की धारा तीन, पांच और 12 को चुनौती देती है। लिहाजा, याचियों को अंतरिम राहत दी जा सकती है। हालांकि, सरकारी अधिवक्ता की ओर से इसका विरोध किया गया। कोर्ट ने याचियों को कोई राहत नहीं दी, लेकिन यूपी सरकार से जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें