इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कीट वैज्ञानिकों ने खोजी मास्क वाली दुर्लभ मधुमक्खी।
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पहचान के लिए ‘मास्क’ बना आधार
इन कीटों को इनके चेहरे पर मौजूद पीले या सफेद निशानों के कारण ‘मास्क बी’ कहा जाता है। इविवि के कीट वैज्ञानिक डॉ. सैनी ने बताया कि ये कीट आकार में अत्यंत छोटे (4 से 6 मिमी) होते हैं। इनकी सटीक पहचान के लिए शोध में इनके जननांगों की संरचना को वैज्ञानिक आधार बनाया गया है।
अपने गुरु प्रो. गुप्ता के सम्मान में नाम दिया ‘हाइलयस गुप्ताई’
डॉ.जगदीश सैनी ने अपने गुरु प्रो.राजीव कुमार गुप्ता के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए अपनी इस महत्वपूर्ण खोज का नामकरण किया है। उन्होंने मास्क वाली मधुमक्खी का नाम ‘हाइलयस गुप्ताई’ रखा है। डॉ. सैनी का मानना है कि यह प्रजाति न केवल भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की विशिष्ट जैव-विविधता को दर्शाती है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुरु-शिष्य परंपरा के गौरव को भी रेखांकित करती है।
स्पेन में तीन नई प्रजातियों की पहचान
इस अंतरराष्ट्रीय शोध टीम ने स्पेन के कैनरी द्वीप समूह के विस्तृत सर्वे के दौरान तीन बिल्कुल नई प्रजातियों की पहचान की है। इनमें हाइलयस हिएरो (एल हिएरो द्वीप), हाइलयस गोमेरेंसिस (ला गोमेरा) और हाइलयस पाल्मेंसिस (ला पाल्मा द्वीप) शामिल हैं।