याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि कोविड से मृत्यु के मामलों में एफआईआर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की अनिवार्यता नहीं थी। चुनाव प्रशिक्षण, मतदान, मतगणना और घर से ड्यूटी स्थल तक का आवागमन सभी चुनाव ड्यूटी के अंतर्गत आते हैं। शीला की चुनाव ड्यूटी ज्वॉइन करने के दौरान मौत हुई। शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि याची सरकारी आदेशों के तहत निर्धारित प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं का पालन करने में विफल रहा। याची ने न तो निर्धारित समय में ऑनलाइन आवेदन किया और न ही दस्तावेज जमा किए।
कोर्ट ने कहा कि प्रशासन की ओर से केवल प्रक्रियागत खामियों के आधार पर दावा खारिज करना गलत है। एक कल्याणकारी राज्य होने के नाते सरकार का दायित्व है कि वह मानवीय और उद्देश्यपरक दृष्टिकोण अपनाए। तकनीकी आधार पर राहत से इन्कार नहीं किया जा सकता। साथ ही कोर्ट ने आजमगढ़ के डीएम के 23 नवंबर 2021 और छह जनवरी 2022 के आदेशों को निरस्त कर दिया। निर्देश दिया कि मामले में एक माह के भीतर पुनः विचार कर नया आदेश पारित करें।