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High Court : केवल तकनीकी आधार पर राहत से जुड़ी योजनाओं से किसी को वंचित नहीं किया जा सकता

Sun, 01 Feb 2026 05:53 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कल्याणकारी और राहत से जुड़ी योजनाओं की व्याख्या केवल तकनीकी औपचारिकताओं के आधार पर नहीं की जा सकती। इनका उद्देश्य पीड़ित परिवारों को तत्काल राहत देना है।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कल्याणकारी और राहत से जुड़ी योजनाओं की व्याख्या केवल तकनीकी औपचारिकताओं के आधार पर नहीं की जा सकती। इनका उद्देश्य पीड़ित परिवारों को तत्काल राहत देना है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने चुनाव ड्यूटी पर जाते वक्त कोविड से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मौत के मामले में आजमगढ़ के डीएम के मुआवजा न देने के आदेश को रद्द कर दिया।

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याची राम सिंह यादव की पत्नी शीला आंगनबाड़ी कार्यकर्ता थीं। उन्हें 2021 के पंचायत चुनाव में मतदान अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था। 12 अप्रैल 2021 को उन्होंने अनिवार्य चुनाव प्रशिक्षण में भाग लिया। इसके बाद 15 अप्रैल 2021 को कराई गई जांच में कोविड संक्रमण की आशंका पाई गई। 18 अप्रैल 2021 को मतदान दल में शामिल होने के लिए शीला आजमगढ़ के ब्लॉक ठेकमा जा रही थीं।

इसी बीच रास्ते में तबीयत बिगड़ी और उनकी मृत्यु हो गई। मृत्यु प्रमाणपत्र 19 मई 2021 को जारी किया गया। इसके बाद अनुग्रह राशि के लिए आवेदन किया पर जिला प्रशासन ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि न तो एफआईआर दर्ज कराई गई और न ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।

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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि कोविड से मृत्यु के मामलों में एफआईआर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की अनिवार्यता नहीं थी। चुनाव प्रशिक्षण, मतदान, मतगणना और घर से ड्यूटी स्थल तक का आवागमन सभी चुनाव ड्यूटी के अंतर्गत आते हैं। शीला की चुनाव ड्यूटी ज्वॉइन करने के दौरान मौत हुई। शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि याची सरकारी आदेशों के तहत निर्धारित प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं का पालन करने में विफल रहा। याची ने न तो निर्धारित समय में ऑनलाइन आवेदन किया और न ही दस्तावेज जमा किए।

कोर्ट ने कहा कि प्रशासन की ओर से केवल प्रक्रियागत खामियों के आधार पर दावा खारिज करना गलत है। एक कल्याणकारी राज्य होने के नाते सरकार का दायित्व है कि वह मानवीय और उद्देश्यपरक दृष्टिकोण अपनाए। तकनीकी आधार पर राहत से इन्कार नहीं किया जा सकता। साथ ही कोर्ट ने आजमगढ़ के डीएम के 23 नवंबर 2021 और छह जनवरी 2022 के आदेशों को निरस्त कर दिया। निर्देश दिया कि मामले में एक माह के भीतर पुनः विचार कर नया आदेश पारित करें।
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