मूल अक्षयवट के नए मार्ग के लिए ऐतिहासिक किला द्वार से मंदिर शिफ्ट कराने के प्रस्ताव पर शुक्रवार को रार मच गई। पुजारी और उनके परिवार के सदस्य मंदिर के सामने धरने पर बैठ गए। इस दौरान जमकर नारेबाजी की गई। पुजारियों का कहना था कि वह मर मिट जाएंगे, लेकिन मंदिर नहीं हटने देंगे।
मंदिर शिफ्ट कराने के प्रस्ताव को विरोध में दिन के 11 बजे ही पातालपुरी व अन्य देव स्थानों के पुजारी व उनके परिवार के सदस्य किला गेट पर स्थित राम जानकी व राधाकृष्ण मंदिर के सामने धरने पर बैठ गए। महिलाएं भी धरनास्थल पर पहुंच गईं। उनका कहना था कि यह प्राचीन मंदिर लोगों की आस्था का प्रतीक है। देश-दुनिया से प्रतिवर्ष हजारों की तादाद में तीर्थयात्री दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। इस मंदिर के हटने से पुजारी परिवारों की आजीविका तो प्रभावित होगी ही, सैकड़ों साल पुरानी परंपरा भी खंडित हो जाएगी। इसके बाद पुजारियों ने किले के कमांडिंग ऑफिसर व कैंटोनमेंट बोर्ड के अध्यक्ष से मिलकर ज्ञापन दिया। इसमें कहा गया है कि किले के गंगा गेट नंबर-1 पर स्थित राम जानकी व राधाकृष्ण मंदिर के उत्तरी छोर पर स्थापित कराने के लिए मेला प्रशासन कह रहा है।
इस मंदिर को शिफ्ट कराया गया तो उनके परिवार के सदस्य भुखमरी की कगार पर आ जाएंगे। पुजारियों ने सेना से मदद की गुहार लगाई और कहा कि सेना हस्तक्षेप करे, ताकि भविष्य में उनके परिवार को परेशानी का सामना न करना पड़े। धरना देने वालों में महंत रवींद्र नाथ योगेश्वर योगी, मुकेश गोस्वामी, पद्मनाथ योगेश्वर, अत्रिमुनि गोस्वामी, हर नारायण गोस्वामी, सौरभ गोस्वामी, अनिल गोस्वामी, रामेश्वर योगेश्वर, सुशीला, शशि, राधा गोस्वामी, सावित्री देवी, रेखा, सुरेखा, चंचल समेत कई लोग शामिल थे।
किला द्वार से राधाकृष्ण मंदिर शिफ्ट कराने को लेकर दिन भर गहमागहमी बनी रही। दोपहर बाद पुलिस के साथ कुछ अफसर पहुंचे। इस दौैरान पुजारी परिवार के सदस्यों के जमावड़े को देखने के बाद लौट गए। फिर कई बार मंदिर शिफ्ट कराने अफसरों की टीम आने की बात कही जाती रही। शाम पांच बजे सेना के कैप्टन राधाकृष्ण मंदिर परिसर पहुंचे।
मूल अक्षयवट के नए रास्ते को लेकर शुक्रवार को सहमति बनाने की कोशिश किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इसके लिए प्रयागराज मेला प्राधिकरण के अफसरों ने पुलिस और सेना के अधिकारियों के साथ मशविरा किया, लेकिन किला द्वार से राधाकृष्ण व राम जानकी मंदिर शिफ्ट कराने को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो सकी। अलबत्ता ऐतिहासिक किले के भीतर कुंभ के तहत मूल अक्षयवट के मार्ग की लंबाई, चौड़ाई के अलावा श्रद्धालुओं के प्रवेश-निकास के अलावा सुरक्षा पहलुओं पर खाका तैयार किया गया। अफसरों ने बताया कि किले में कुंभ के तहत अवस्थापना सुविधाओं का 70 फीसदी काम पूरा कर लिया गया है। शेष काम भी जल्द पूरे हो जाएंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से मूल अक्षयवट को आम श्रद्धालुओं के लिए खोले जाने की घोषणा के बाद नए रास्ते के निर्माण व किले में अवस्थापना सुविधाओं के विकास को लेकर हुई समन्वय बैठक में अफसरों ने विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। खासतौर से मूल अक्षयवट के प्रस्तावित नए रास्ते की बाधाएं दूर कराने पर विचार-विमर्श किया गया। किला द्वार पर स्थित राधाकृष्ण व राम जानकी मंदिर पास के चबूतरे पर शिफ्ट कराने और वही से किले की दीवार खोलकर मूल अक्षयवट जाने के लिए रास्ता तैयार करने के प्रस्ताव पर मेला प्रशासन, पुलिस और सेना के अधिकारियों ने सुरक्षा पहलुओं को ध्यान में रखकर अपना पक्ष रखा। सेना के अधिकारियों की ओर से मंदिर शिफ्टिंग पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिलने से इस पर ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका।
इस मसले पर अभी सेना के अधिकारियों के आदेश का इंतजार करने की बात कही गई। पुलिस अफसरों ने मूल अक्षयवट के नए मार्ग को लेकर सुरक्षा रणनीति का ब्यौरा सामने रखा। श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास के प्रस्तावित रूट बताए गए। समन्वय बैठक के बाद अफसर मूल अक्षयवट के नए रास्ते पर कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थे। एसएसपी कुंभ मेला केपी सिंह ने बताया कि अभी नए रास्ते को लेकर सेना के साथ सहमति नहीं बन सकी है। कोशिश हो रही है कि जल्द ही अवरोध दूर करा लिया जाए। कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद के अनुसार किले में श्रद्धालु हित की सुविधाओं पर समन्वय बैठक में विभागवार चर्चा हुई। पीडब्ल्यूडी ने किले में अवस्थापना सुविधाओं का काम 70 प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। शेष 30 फीसदी काम भी जल्द पूरा कराने का आश्वासन दिया है।
पातालपुरी के वटवृक्ष की किला परिसर में परिक्रमा कराने की तैयारी की गई है। इसके लिए किला परिसर की ग्रिल हटाई जाएगी। वहां ईंट की चहारदीवारी बनाई जा रही है। मूल अक्षयवट के दर्शन के बाद वापस किला में प्रवेश करने के बाद श्रद्धालु वहां परिक्रमा करेंगे और फिर गुरुद्वारा के पास बन रही रेलिंग से होकर सरस्वती कूप के दर्शन करते हुए त्रिवेणी मार्ग पर बाहर निकल जाएंगे।