लापता होने के करीब दो दशक बाद एक महिला सोमवार को परिजनों से मिली तो उसके खुशी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। 30 वर्ष की उम्र में गायब हुई महिला को लखनऊ स्थित राजकीय महिला शरणालय में शरण मिली थी। जानकारी होते ही उसके मिलने की आस छोड़ चुके परिजन वहां पहुंचे तो पहचान हुई।
सरायममरेज थाना क्षेत्र के खड़हरा गांव के रहने वाले राजेंद्र प्रसाद पटेल की पत्नी श्रीमती रामसखी पटेल की करीब दो दशक पहले मानसिक स्थिति बिगड़ने पर घर से अचानक लापता हो गई थी। काफी खोजबीन के बाद भी उसका कुछ अता-पता नहीं चला तो परिजनों ने सरायममरेज थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाई और कई साल तक जगह-जगह खोजबीन में लगे रहे।
ज्यादा समय बीत गया तो परिजनों ने उसकी मिलने की आस छोड़ दी। खेती किसानी करने वाले राजेन्द्र प्रसाद पटेल को रामसखी से पांच बच्चे क्रमश: अवधेश कुमार, बृजेश, पवन तथा दो बेटियां साधना व राधना थी। जिसमें पवन सबसे छोटा था और मां के लापता होने के छह माह पहले ही उसका जन्म हुआ था। राजेन्द्र पटेल दूसरी शादी नहीं करने का फैसला लिया और बच्चों की पढ़ाई लिखाई व उनकी परवरिश में जुट गया।
उधर, रविवार को परिजनों को जानकारी मिली कि करीब दो दशक पहले घर से गायब रामसखी लखनऊ स्थित राजकीय महिला शरणालय में मौजूद है तो परिजनों के खुशी का ठिकाना नहीं रहा। राजेन्द्र पटेल अपनी पत्नी से मिलने के लिए परिजनों संग लखनऊ स्थित महिला सेवा आश्रम पहुंचे और पत्नी रामसखी से मुलाकात की तो पहचान हुई।
इस दौरान दो दशक से विछुड़े दंपती के आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। परिजनों के मुताबिक कागजी खानापूर्ति व विभागीय कानूनी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद वह लखनऊ से मंगलवार को घर के लिए निकलेंगे। इधर घर पर रामसखी के तीन बेटे व दो बेटियों सहित परिवार के अन्य लोग उसकी एक झलक पाने के लिए इंतजार में हैं। उधर एसओ सरायममरेज भरत कुमार का कहना है कि उन्हें जानकारी मिली है। लेकिन परिजनों से मिलने के बाद ही स्थिति कुछ साफ हो सकेगी।