इस बीच पीएसी धूमनगंज में पेंटर का काम भी किया, लेकिन एहसास हुआ कि मैं किसी और चीज के लिए बना हूं। उस वक्त ही रामलीला के साथ ही अपनी पूरी जिंदगी बिताने का फैसला किया। अब मोहर्रम के समय में ताजिया और रामकथा से जुड़े सभी पात्रों को तैयार करता हूं। साथ ही परिवार का हमेशा से ही योगदान मिलता रहा है। किसी ने कभी भी आज तक प्रभु के लिए काम करने को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है। साथ ही प्रभु राम के आने से पूरा राममय माहौल हो गया है। इसे देखकर काफी अच्छा लग रहा है।
40 सालों से कर रहा हूं काम
वर्षों पुरानी प्रयागराज की पथरचट्टी रामलीला सबसे भव्य और आकर्षक होती है। ये प्राचीन होने के साथ ही ऐतिहासिक भी है। निसार इसी रामलीला समिति के साथ 40 सालों से काम करते आ रहे हैं। वो प्रभु राम की सेवा में अंतिम सांस तक लगे रहना चाहते हैं। रामलला के लिए केवट तैयार करना मेरे लिए बहुत ही गर्व की बात है। निसार अहमद कहते हैं, राम सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। उन्होंने एक बेटे, भाई और पति के रूप में जिस तरह जीवन गुजारा है, वह एक नजीर हैं, उनके कदम पर चलकर एक बेहतरीन इंसान बनने की कोशिश की जा सकती है।