मुकद्दस रमजान का महीना बेशुमार बरकतों वाला है। इस महीने में रोजेदारों पर अल्लाह की बेशुमार रहमतें बरसती हैं। सारे गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। इस महीने का तीसरा अशरा 20वें रोजे मगरिब से शुरू हो गया है। जो ईद का चांद दिखाई देने तक जारी रहेगा। इस आखिरी अशरे में रोजेदार इबादत में ज्यादा समय बिताकर अल्लाह से मगफिरत और जहन्नम की आग से पनाह मांगते हैं। मस्जिदों में नमाज, तरावीह और कुरआन पाक की तिलावत का सिलसिला जारी है।
माह-ए-रमजान का अखिरी अशरा जहन्नुम की आग से निजात का शुरू हो गया है। रमजान में इस अशरे की बड़ी अहमियत है। इससे गुनाहगारों को को गुनाह माफ कर जहन्नुम से निजात मिलती है। दूसरे अशरे के अंतिम दिन मंगलवार को कोरांव, बड़ोखर, महुली की मस्जिदों और घरों में रोजेदारों ने पांच वक्त की नमाज अदा की। रातभर जागकर खुदा की इबादत की। इलाहाबाद डिस्ट्रिक कोऑपरेटिव बैंक के अनुभाग अधिकारी मोहम्मद बिलाल ने बताया कि रमजान मुबारक माह को तीन अशरों में बांटा गया है।मोहम्मद बिलाल ने हिदायत देते हुए कहा कि मोमिनों को चाहिए कि रमजान की तरह दूसरे महीने में भी खुदा की इबादत कर नेक काम करें।