गुजरात व महाराष्ट्र के मटेरियल, राजस्थान का मजबूत धागा और प्रयागराज के हुनरमंद हाथों की कलाकारी ने राखी बाजारों में चार चांद लगा दिए हैं। इस बार की राखियों की आकर्षक पैकेजिंग और विविधता है। इसके अलावा महाकाल, खाटू श्याम, राधा कृष्ण और जय श्रीराम लिखी राखियां भी पसंद बनी हुई हैं।
दीया लगी सजावटी प्लेट भी बाजार में उपलब्ध है। वहीं, बाजार में छोटा भीम, मोटू-पतलू वाली रंग-बिरंगी राखियां भी छाई हुई हैं। एक स्वयं सहायता समूह से जुड़ी राधिका अग्रहरि ने बताया कि होली के पहले ही राखी का बड़ा ऑर्डर मिल गया था। सोरांव की प्रतिभा केसरी ने बताया कि कारोबारियों ने दो-तीन माह पहले ही स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को ऑर्डर दिए थे।
कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल ने बताया कि बाजार में 50 फीसदी से ज्यादा स्थानीय कारीगरों और महिलाओं के हाथों की बनी हुई राखी हैं। रक्षा बंधन तक 15 करोड़ रुपये तक के कारोबार की उम्मीद है। वहीं, बहनों ने कूरियर और डाक से राखियां भेजनी शुरू कर दी है। कूरियर के दाम में भी पांच से 10 फीसदी इजाफा हुआ है।
सात दिन में 1317 राखी बुक, 35 विदेश गईं
संगमनगरी में एक सप्ताह में 1317 राखियां स्पीड पोस्ट के जरिये बुक की गई हैं। सबसे ज्यादा राखियां महाराष्ट्र के लिए बुक की गईं। वहीं, गुजरात और महाराष्ट्र से सबसे अधिक राखियां यहां आई हैं। ज्यादातर ग्रामीण इलाकों के लिए हैं। वहीं, 15 से 21 अगस्त के बीच 35 राखियां विदेश भेजी गईं। यूनाइटेड किंगडम के लिए 10, अमेरिका के लिए नौ और कनाडा के लिए छह राखियां बुक हुईं।