आसमान में खगोलीय घटना देखते बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला।
19 अप्रैल को भी बनी थी ऐसी ही आकृति
सूर्य जब मध्य आकाश में होता है और उसके नीचे पानी से भरे बादल होते हैं, तब इस प्रकार की आकृति बनती है। बादलों का घेरा सूर्य के करीब होने के कारण कई बार इंद्रधनुष के रंग स्पष्ट नहीं होते हैं। वैसे, बीते 19 अप्रैल को भी इसी तरह सूर्य के चारों तरफ गोल आकृति बनी थी, लेकिन थोड़ी देर के लिए।
डॉ. किरण बताते हैं कि जब सूर्य पूर्व की तरफ हो और पानी वाले बादल वायुमंडल में हों, तो इंद्रधनुष पश्चिम दिशा में बनता है। यदि सूर्य पश्चिम दिशा में हो तो इंद्रधनुष पूर्व दिशा में दिखाई देता है। पिछले दो दिनों से आसमान में बादल छाए हैं। बूंदाबादी भी हुई है। ऐसे में पानी वाले बादल वायुमंडल में फैले हुए हैं। इसी से अचानक गोल इंद्रधनुष दिखाई देने लगा। यह सीमित स्थानों पर ही देखा गया।
वहीं, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वातावरणीय एवं समुद्री विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र राय के अनुसार इस तरह की खगोलीय घटना को सन हैलो कहा जाता है। बादलों में आइस क्रिस्टल होने से यह सर्किल बनता है। अमूमन यह घटना चंद मिनट दिखती है, लेकिन इस बार लंबे समय तक रहने के कारण इसकी जानकारी बहुत लोगों को हो गई। ऐसे मौसम में बारिश होने की संभावना भी बढ़ जाती है।
आसमान में खगोलीय घटना देखते बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला।
कॉलेजों-स्कूलों के बच्चे भी बने साक्षी, फोटो भी खूब ली गईं
खगोलीय घटना की गूंज चौतरफा दिखी। हर कोई इस अनोखे दृश्य को अपने मोबाइल फोन में कैद करने में जुटा दिखा। इसकी तस्वीरें फेसबुक, वाट्सएप, ट्विटर पर शेयर की गईं। फोन करके अपने परिचितों को इसकी जानकारी दी, देखने के लिए कहा। सीएमपी डिग्री कॉलेज में शिक्षक और विद्यार्थी कक्षाओं से बाहर आकर दृश्य को कैमरे में कैद करते रहे। यहीं के शिक्षक राम चिरंजीव और सपना मौर्या ने बताया कि बहुत से विद्यार्थियों ने परिसर के अंदर लगे तिरंगे झंडे के साथ इस दृश्य को कैद किया। कई स्कूलों ने बच्चों को कक्षा से बाहर निकालकर इसका साक्षी बनाया गया।
मौसम में बदलाव का सूचक, शुभ-अशुभ से संबंध नहीं
सूर्य के चारों तरफ जो आभामंडल बनता है, उसे परिवेश भी कहा जाता है। शुभ-अशुभ से इसका कोई संबंध नहीं है। ज्योतिष के अनुसार यह अचानक मौसम में बदलाव का सूचक है। जहां-जहां भी यह नजर आया है, वहां पर बारिश के आसार बन रहे हैं।- प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय, न्यासी, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास
आसमान में ये नजारे ध्रुवीय इलाकों या फिर लद्दाख जैसी ऊंची बर्फीली पहाड़ियों पर नजर आते हैं। अब मैदानी इलाकों में भी अद्भुत नजारा दिखाई देने लगा है। भीषण गर्मी के बीच ऊंचाई पर घने बादल बने हुए हैं। ऊपरी सतह पर पानी से टकराने के बाद ही इस तरह का गोल छल्ला बनता है। - प्रो. अभय कुमार, खगोल विज्ञानी, बीएचयू
सूर्य के चारों तरफ बनने वाले इंद्रधनुषी गोले को ज्योतिष में परिवेश कहा जाता है। यह अच्छी वर्षा का सूचक है। जल्द ही बारिश हो सकती है। -प्रो. विनय पांडेय, पूर्व विभागाध्यक्ष ज्योतिष, बीएचयू