इतिहास बन जाएंगे रेलवे के कई पद
चर्चा यह भी है कि अब टाइपिस्ट, सहायक कुक, बिल पोर्टर, सेनेटरी हेल्पर, माली, दफ्तरी, कारपेंटर, पेंटर, गार्डनर, असिस्टेंट सेल्समैन, कैटरिंग असिस्टेंट, वॉलमैन सहित कई पदों को खत्म कर इन पदों पर कार्यरत स्टाफ को अन्य विभागों में भेज दिया जाएगा। साथ ही भविष्य में इन पदों पर रेलवे आगे भर्ती भी नहीं करेगा। बोर्ड ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जोनल रेलवे अपने स्तर पर भी ऐसे पदों को चिन्हित करे, जिन पर स्टाफ का पूरा उपयोग नहीं हो रहा है। इस श्रेणी में टाइम कीपर, स्टाफ, सांख्यिकी स्टाफ, टिकटिंग स्टाफ, सुरक्षा स्टाफ, स्टोर खलासी सहित अन्य पद शामिल हैं।
एनसीआर गठन के जोन में थे 80 हजार पद, अब रह गए 62 हजार
एनसीआर जोन का गठन एक अप्रैल 2003 को हुआ था, तब यहां कुल पदों की संख्या तकरीबन 80 हजार थी। बीते 19 वर्ष में यहां पद घटकर 62 हजार ही रह गए। अब बोर्ड द्वारा गैरसंरक्षा श्रेणी के 50 फीसदी पदों को सरेंडर करने का फरमान जारी किया गया है। अगर ऐसा हुआ तो यहां दस हजार से ज्यादा पद और कम हो जाएंगे।
कर्मचारियों की संख्या घटाकर निजीकरण का प्रयास किया जा रहा है। इसी वजह से रेलवे बोर्ड ने गैरसंरक्षा श्रेणी के 50 फीसदी पद सरेंडर करने को कहा हैं, मेंस यूनियन ऐसा नहीं होने देगी। इसका पुरजोर विरोध होगा। - डीएस यादव, मंडल मंत्री, नार्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन
इंप्लाइज संघ शुरू से ही कह रहा है कि केंद्र सरकार हर हाल में रेलवे का निजीकरण करने को आतुर है। पदों को सरेंडर नहीं होने दिया जाएगा। इसके विरोध में वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाकर आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। - आरपी सिंह, जोनल महामंत्री, नार्थ सेंट्रल रेलवे इंपलाइज संघ
रेलवे बोर्ड से अभी कई पत्र प्राप्त हुए हैं। उन सभी पर समग्र अध्ययन चल रहा है। बीते कुछ वर्ष में ऐसे कई पद हैं, जिनका कोई उपयोग नहीं है, बीते कुछ वर्ष में नई एक्टिविटी भी शुरू हुई हैं। उसके सापेक्ष पद नहीं है। ऐसे में अब जिन पदों का उपयोग नहीं रह गया है उन कर्मचारियों से क्या काम लिया जाए, उस पर मंथन चल रहा है। यह पूरी एक रेश्लाइजेशन प्रक्रिया है। - डॉ. शिवम शर्मा, सीपीआरओ, एनसीआर